देश के लिए मां का त्याग... 19 महीने की बच्ची को छोड़ पदक का सपना पूरा करने पेरिस पहुंची दीपिका कुमारी

ओलंपिक के लिए भारतीय एथलीट धीरे-धीरे पेरिस भी पहुंच रहे हैं। भारतीय आर्चर दीपिका कुमारी भी ओलिंपिक में चुनौती पेश करने के लिए पेरिस पहुंच गई हैं। वह अपनी 19 महीने की बेटी को छोड़कर पेरिस में अपना जलवा दिखाने के तैयार है। लेकिन, उन्हें अपनी बेटी की कमी खल रही है।
पेरिस ओलंपिक 2024 दीपिका कुमारी को पेरिस में अपनी बेटी की याद आ रही है
दीपिका कुमारी (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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पेरिस: पेरिस ओलंपिक का आगाज 26 जुलाई से होने जा रहा है। इसकी तैयारी भी लगभग पूरी हो गई है। भारत के खिलाड़ी भी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। इस बार भारत को अपने एथलिट्स से काफी उम्मीदे हैं, इसी उम्मीद को पूरा करने एक मैं अपनी 19 महीने की बेटी को छोड़कर पेरिस पहुंच गई हैं। हम बात कर रहे हैं भारतीय आर्चर दीपिका कुमारी की, जो भारत को नाम रोशन करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

दरअसल, पेरिस ओलंपिक के लिए एथलीटों की तैयारी जोरों-शोरों पर है। जिसके लिए अब भारतीय एथलीट धीरे-धीरे पेरिस भी पहुंच रहे हैं। भारतीय आर्चर दीपिका कुमारी भी ओलंपिक में चुनौती पेश करने के लिए पेरिस पहुंच गई हैं। वह अपनी 19 महीने की बेटी को छोड़कर पेरिस में अपना जलवा दिखाने के तैयार है। लेकिन, उन्हें अपनी बेटी की कमी खल रही है।

दीपिका कुमारी का सपना है कि वह ओलंपिक में पदक जीतकर भारत का नाम रोशन करें, उनके सपने के सामने यह बहुत छोटा सा त्याग है, हालांकि एक मां के लिए उसकी बेटी से भी बढ़कर कुछ और भी नहीं होता है, लेकिन वह भारत की भी बेटी है, ऐसे में वह हर तरफ से अपना कर्तव्य पूरा कर रही हैं।

बताते चलें कि दीपिका कुमारी चौथी बार ओलंपिक खेलों में भाग ले रही हैं। हालांकि वह अब तक एक भी मेडल नहीं जीत पाई हैं। लेकिन इस बार वह कमाल दिखा सकती हैं। दीपिका कुमारी कहती है कि अपनी 19 महीने की बेटी को छोड़कर आना निराशा है, लेकिन ओलंपिक पदक के सामने उन्हें इससे कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने कहा कि अपनी बेटी से दूर होने के दर्द को बयां करना मुश्किल है, लेकिन यह उस चीज को हासिल करने के बारे में भी है जिसके लिए हम इतने सालों से लगातार मेहनत कर रहे हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि दीपिका दिसंबर 2022 में मां बनी हैं, उसके बाद खेलों में वापसी करना उनके लिए काफी मुश्किल था। उनकी मांसपेशियों में जकड़न आ गई और उनके लिए 19 किलो का धनुष उठाना लगभग असंभव हो गया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और पेरिस ओलंपिक के लिए खुद को तैयार किया।

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