सुनील गावस्कर (फोटो- सोशल मीडिया)
IND vs NZ 3rd ODI: टीम इंडिया को अपने घरेलू मैदान पर एक बार फिर न्यूजीलैंड के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। इंदौर में खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले में ब्लैक कैप्स ने भारत को 41 रन से हराते हुए तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। विराट कोहली के शानदार शतक के बावजूद भारतीय टीम जीत हासिल नहीं कर सकी। इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने इतिहास रच दिया और पहली बार भारत में वनडे इंटरनेशनल की द्विपक्षीय सीरीज जीतने में सफलता पाई।
यह पिछले 14 महीनों में दूसरी बार है जब टीम इंडिया को अपने ही घर में न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज गंवानी पड़ी है। इससे पहले साल 2024 में न्यूजीलैंड ने भारत को तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में मात देकर सभी को चौंका दिया था। एक बार फिर घरेलू हालात में हार ने भारतीय टीम के प्रदर्शन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
टीम इंडिया की इस हार से फैंस ही नहीं, बल्कि पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर भी हैरान नजर आए। उन्होंने मैच के बाद टीम की एक बड़ी कमजोरी की ओर इशारा किया। गावस्कर के मुताबिक यह हार बल्लेबाजों या गेंदबाजों की नाकामी की वजह से नहीं हुई, बल्कि बीच के ओवरों में की गई कमजोर फील्डिंग ने टीम को भारी नुकसान पहुंचाया।
गावस्कर ने खास तौर पर उन फील्डर्स पर निशाना साधा, जो न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को आसानी से स्ट्राइक बदलने से रोक नहीं सके। उनका मानना है कि भारतीय फील्डर्स की सुस्ती के चलते न्यूजीलैंड के मिडिल ऑर्डर बल्लेबाजों ने रन गति बनाए रखी। इससे गेंदबाजों पर बना दबाव धीरे-धीरे खत्म होता चला गया और वे संघर्ष करते नजर आए।
जियोस्टार पर न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर साइमन डूल के साथ बातचीत में गावस्कर ने किसी खिलाड़ी का नाम लिए बिना अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुछ खिलाड़ियों ने बेहद आसानी से सिंगल्स लेने दिए। हालांकि, उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली का बचाव करते हुए कहा कि दोनों तेज फील्डर हैं और मैदान पर उनकी चुस्ती किसी से छिपी नहीं है। इसके बावजूद गावस्कर का मानना था कि टीम की फील्डिंग और ज्यादा प्रोएक्टिव हो सकती थी।
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सुनील गावस्कर ने आगे कहा कि आसान सिंगल्स देकर भारतीय फील्डर्स ने गेंदबाजों द्वारा बनाए गए दबाव को खुद ही खत्म कर दिया। वनडे जैसे फॉर्मेट में जहां मोमेंटम बेहद अहम होता है, वहां इस तरह की चूक भारी पड़ती है। उनकी मानें तो फील्डिंग में लापरवाही की वजह से डेरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स जैसे बल्लेबाजों को बिना किसी जोखिम के क्रीज पर टिकने और बड़ी पारियां खेलने का मौका मिल गया।