
कप्तान शुभमन गिल और कोच गौतम गंभीर (फोटो- सोशल मीडिया)
Eden Gardens Pitch Controversy: भारत की साउथ अफ्रीका के खिलाफ 30 रन की चौंकाने वाली हार ने सिर्फ बल्लेबाज़ी की नाकामी को ही नहीं, बल्कि टीम मैनेजमेंट की पिच रणनीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 124 रन के आसान से लक्ष्य का पीछा करते हुए मिली यह हार घरेलू मैदान पर भारत का सबसे नाकाम चेज़ भी रहा। इस हार के बाद चर्चा का केंद्र यह है कि क्या कप्तान शुभमन गिल और हेड कोच गौतम गंभीर पिच की रणनीति पर एकजुट हैं या दोनों की सोच अलग-अलग है?
पिछले महीने वेस्टइंडीज टेस्ट सीरीज से पहले शुभमन गिल ने साफ कहा था कि टीम अब “रैंक टर्नर्स” यानी बहुत ज्यादा स्पिन मददगार पिचें बनाने के दौर से आगे बढ़ चुकी है। गिल ने पहले जोर देकर कहा था कि “हम ऐसी पिच चाहते हैं जिसमें बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ दोनों को मदद मिले।” लेकिन इसके ठीक उलट, साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहला टेस्ट मैच ऐसी पिच पर खेला गया जो गिल के इस बयान से मेल नहीं खाती थी।
सूत्रों के अनुसार ईडन गार्डन्स की पिच को एक हफ्ते तक पानी नहीं दिया गया और हर शाम उसे कवर करके रखा गया। नतीजा यह हुआ कि मैच की शुरुआत से ही पिच सूखी, टूटती-बिखरती और बल्लेबाज़ों के लिए बेहद मुश्किल हो गई। भारत साउथ अफ्रीका के बीच का ये मुकाबला सिर्फ 8 सेशन में खत्म हो गया। इस दौरान कुल 38 विकेट गिरे। इसमें 22 स्पिनर ने तो 16 विकेट तेज गेंदबाजों ने झटके। ये आंकड़ा साफ दिखाता है कि पिच शुरुआती दिन से उम्मीद के मुताबिक नहीं थी।
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जहां शुभमन गिल संतुलित पिचों की बात कर रहे हैं, वहीं गौतम गंभीर हार के बाद भी अपनी रणनीति पर डटे रहे और साफ कहा कि यही पिच वे चाहते थे। यानी एक तरफ कप्तान बैलेंस्ड विकेट की सोच रखते हैं, दूसरी तरफ कोच पारंपरिक भारतीय स्पिन-फ्रेंडली पिचों पर भरोसा दिखा रहे हैं। यह अंतर टीम की तैयारी और सोच में एक नया सवाल खड़ा करता है। ईडन टेस्ट की हार ने इस मुद्दे को और गहरा कर दिया है। अब गुवाहाटी टेस्ट में टीम मैनेजमेंट किस तरह की पिच चुनता है, इससे इस विवाद की दिशा तय हो सकती है।






