लैटरल एंट्री के मुद्दे पर विवाद क्यों? पहले भी हुई हैं नियुक्तियां

पूर्व प्रधानमंत्री यदि अन्य उल्लेखनीय नामों की चर्चा करें तो एन रघुराम राजन को पहले वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार और उसके बाद रिजर्व बैंक का गवर्नर पद दिया गया था। सबसे खास नाम नंदन निलेकणी का है जिन्होंने यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के प्रमुख के रूप में आधार कार्ड कार्यक्रम शुरू किया।
लैटरल एंट्री के मुद्दे पर विवाद क्यों? पहले भी हुई हैं नियुक्तियां
(डिजाइन फोटो)
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सरकार चलाने में मदद के लिए बाहरी क्षेत्रों के ऐसे विशेषज्ञों को लाना जो कि सिविल सर्वेन्ट नहीं हैं, गलत नहीं माना जाना चाहिए। अन्य देशों में भी ऐसा प्रयोग होता रहा है। इस तरह की लैटरल एंट्री में एक ही सावधानी बरती जानी चाहिए कि निष्ठावानों को उपकृत करने की बजाय प्रतिभावानों को लाया जाए, हो सकता है कि सिविल सर्विस के अधिकारियों को यह बात अखरे कि उन्हें पदोन्नति या जिम्मेदारी की बजाय बाहरी विशेषज्ञों को क्यों लाया जा रहा है?

कांग्रेस ने मोदी सरकार के लैटरल एंट्री के कदम का विरोध किया है लेकिन उसके शासनकाल में भी तो यह होता आया है। जब देने लालबहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने डॉ. श्रीमन्नारायण को नेपाल में और इतिहासकार डॉ. भगवतशरण उपाध्याय को मारिशस में भारत का राजदूत नियुक्त करवाया था, जबकि ये दोनों भारतीय विदेश से वा (आईएफएस) में शामिल नहीं थे। उनका अपने क्षेत्रों में विशिष्ट सम्मान था।

डॉ. मनमोहन सिंह ऑक्सफोर्ड में प्रोफेसर थे। उन्हें 1972 में मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया। इसी तरह 1988 में मटिकसिंह अहलूवालिया को 1988 में प्रधानमंत्री का विशेष सचिव बनाया गया जो 1990 में वाणिज्य सचिव बने। 1989 में सैम पित्रोदा को टेलीकॉम कमीशन का प्रमुख बनाया गया था। 2009 में वह प्रधानमंत्री के सलाहकार बने। 1994 में विजय केलकर को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में सचिव बनाया गया।

बिमल जालान जैसे अर्थशास्त्री को 1981 में मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया। प्रकाश टंडन को राज्य व्यापार निगम का प्रमुख पद दिया गया था। राजीव गांधी के मित्र सुमन दुबे को सूचना व प्रसारण मंत्रालय में प्रेस सलाहकार बनाया गया था। 1993 में शंकर आचार्य को भी लैटरल एंट्री के जरिए मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया था।

यदि अन्य उल्लेखनीय नामों की चर्चा करें तो एन रघुराम राजन को पहले वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार और उसके बाद रिजर्व बैंक का गवर्नर पद दिया गया था। बाद में वे अध्यापन करने शिकागो विश्वविद्यालय लौट गए थे। सबसे खास नाम नंदन निलेकणी का है जिन्होंने यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के प्रमुख के रूप में आधार कार्ड कार्यक्रम शुरू किया। समय-समय पर बाहर से लाए गए नामी विशेषज्ञों की सीधी नियुक्तियां की जाती रहीं। यदि जनहित में ऐसा किया जाता है तो इसमें राजनीति लाने और आपत्ति उठाने की कोई आवश्यकता नहीं है। अमेरिका में भी नया राष्ट्रपति अपनी पसंद के सेक्रेटरीज नियुक्त करता है जिनमें से कितने ही सिविल सर्विस से संबंध नहीं रखते।

लेख चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

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