

CBSE OSM Controversy: CBSE परीक्षा परिणाम और OSM कॉन्ट्रैक्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा हमला बोलते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 18.5 लाख छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया और सरकार जवाब देने के बजाय ट्रांसफर..ट्रांसफर..का गेम खेल रही है।
सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम विवाद के बीच बोर्ड के चेयरमैन और सचिव के तबादले को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सरकार पर जवाब देने के बजाय मामले को दबाने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, "सीबीएसई में हुई कथित अनियमितताओं की पूरी जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय की है और इसके लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जवाबदेह हैं। पार्टी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।"
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाते हुए लिखा कि CBSE अध्यक्ष - ट्रांसफ़र। CBSE सचिव - ट्रांसफ़र। एक-सदस्यीय “जाँच” समिति - गठित। और मामलें का असल ज़िम्मेदार, धर्मेंद्र प्रधान सुरक्षित हैं। कांग्रेस ने कहा कि जो अधिकारी थे उन्हें तो हटा दिया गया है लेकिन जो जिम्मेदार मंत्री है उन्हें बचाया जा रहा है। यह जवाबदेही नहीं - यह cover-up है। उन्होंने कहा कि हमारी माँग आज भी वही है, शिक्षा मंत्री को बर्ख़ास्त किया जाए और स्वतंत्र न्यायिक जाँच हो.. ये मांगें कोई मोदी सरकार की एक महीने पुरानी अंदरूनी फ़ाइल नहीं जो हम भुला देंगे।
राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री को 18.5 लाख CBSE छात्रों की परवाह होती तो वे कब का धर्मेंद्र प्रधान को हटा दिए होते। विवादों में घिरी कंपनी COEMPT को ठेका धर्मेंद्र प्रधान और मोदी सरकार की निगरानी में दिया गया था। हालांकि सीबीएसई और संबंधित कंपनी ने भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार किया है, जबकि केंद्र सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति की बैठक के तुरंत बाद सीबीएसई अधिकारियों का तबादला किए जानें पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार राजनीतिक नेतृत्व की जवाबदेही तय करने के बजाय नौकरशाहों पर जिम्मेदारी डालने का प्रयास कर रही है।
वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और राजधानी दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी मोदी सरकार की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि इतने बड़े विवाद के बाद केवल CBSE चेयरमैन और सचिव का तबादला करना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। यह सजा है या अधिकारियों को संरक्षण देने की कोशिश?
दरअसल हाल ही में सोशल मीडिया पर CBSE छात्र निसर्ग अधिकारी ने दावा किया था कि उन्हें फरवरी 2026 में CBSE के OSM पोर्टल में कई सुरक्षा खामियां मिली। जिसके कुछ स्क्रीनशॉट और तकनीकी डिटेल्स शेयर करते हुए छात्र ने बताया कि पोर्टल में ऐसी कमियां थीं जिनकी मदद से कोई भी एग्जामिनर की तरह लॉगिन कर सकता था। इस कमी की वजह से कोई भी कॉपी चेक करने और नंबर देने तक की पहुंच हासिल कर सकता है। निसर्ग ने कहा कि उसने यह जानकारी सार्वजनिक करने से पहले इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली CERT-In यानी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम को पूरी रिपोर्ट भेजी थी।