US-ईरान युद्ध का असर, विदेशी मुद्रा बचाने के लिए RBI ने $12 बिलियन का बेचा गोल्ड रिजर्व! रिपोर्ट में दावा

Gold Reserves: विशेषज्ञों के मुताबिक, जब भी वैश्विक स्तर पर युद्ध या कोई बड़ा संकट खड़ा होता है, तो दुनिया भर के निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की तरफ भागते हैं।
RBI Sold $12 Billion Gold Reserves
कॉन्सेप्ट फोटो, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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RBI Sold $12 Billion Gold Reserves: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थितियों का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत के वित्तीय प्रबंधन पर भी दिखने लगा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी विदेशी मुद्रा संपत्तियों को सुरक्षित रखने और रुपये की स्थिति को स्थिरता देने के लिए अपने सोने के भंडार में से लगभग 12 बिलियन डॉलर का सोना बेचा है। इस कदम को केंद्रीय बैंक द्वारा बाजार में पैदा हुए अप्रत्याशित जोखिमों को कम करने की एक बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जब भी वैश्विक स्तर पर युद्ध या कोई बड़ा संकट खड़ा होता है, तो दुनिया भर के निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की तरफ भागते हैं। इसके परिणामस्वरूप डॉलर इंडेक्स में भारी उछाल आता है और उभरते बाजारों (Emerging Markets) की मुद्राओं, जैसे कि भारतीय रुपये पर भारी दबाव बनता है।

RBI क्यों खाली करना पड़ा गोल्ड रिजर्व?

इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय बैंकों को अपनी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के पोर्टफोलियो में रीबैलेंसिंग (Rebalancing) करनी पड़ती है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आरबीआई ने इसी रणनीति के तहत सोने के भंडार का एक हिस्सा बेचा है, ताकि लिक्विडिटी (नकद उपलब्धता) को बढ़ाया जा सके और विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करके रुपये को रिकॉर्ड गिरावट से बचाया जा सके।

सबसे ज्यादा गोल्ड रिजर्व वाले टॉप-10 देश

रैंक                                   देश स्वर्ण भंडार (टन में)
1 अमेरिका 8,133.46
2 जर्मनी 3,350.25
3 इटली 2,451.84
4 फ्रांस 2,437
5 रूस 2,326.52
6 चीन 2,306.3
7 स्विट्जरलैंड 1,039.94
8 भारत 880.34
9 जापान 845.97
10 तुर्की 614.3

क्या गोल्ड रिजर्व बेचना एक सामान्य कदम?

आमतौर पर केंद्रीय बैंक सोने को एक सुरक्षित और दीर्घकालिक संपत्ति के रूप में अपने पास रखते हैं और इसे आसानी से नहीं बेचा जाता। हालांकि, अत्यधिक विपरीत परिस्थितियों में, जब विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य हिस्सों पर दबाव बहुत अधिक बढ़ जाता है, तब इस तरह के कड़े फैसले लिए जाते हैं। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि $12 बिलियन के सोने की बिक्री का यह फैसला पूरी तरह से 'टैक्टिकल एसेट एलोकेशन' (Tactical Asset Allocation) का हिस्सा हो सकता है। इसका उद्देश्य देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार के मूल्य को स्थिर रखना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की साख को मजबूत बनाए रखना है।

भारतीय इकोनॉमी और रुपये पर क्या असर?

इस समय भारतीय रुपया अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण लगातार दबाव का सामना कर रहा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, और यूएस-ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से देश का आयात बिल बढ़ जाता है। आरबीआई द्वारा गोल्ड रिजर्व के जरिए जुटाए गए इस फंड का उपयोग विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। जब बाजार में डॉलर की पर्याप्त उपलब्धता होगी, तो रुपये की विनिमय दर में आ रही तेज गिरावट पर ब्रेक लगाया जा सकेगा, जिससे देश में आयातित महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

RBI की ओर से अधिकारिक पुष्टि नहीं

हालांकि, आरबीआई की ओर से इस रिपोर्ट पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का कहना है कि आगामी मौद्रिक नीति समीक्षाओं में इस कदम के प्रभाव स्पष्ट दिखाई देंगे। आने वाले समय में केंद्रीय बैंक के सामने दोहरी चुनौती होगी।

वैश्विक संकटों के लिए RBI तैयार

पहली, देश के सोने के भंडार को दोबारा उसी स्तर पर लाना और दूसरी, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव जारी रहने की स्थिति में भारतीय बाजार को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखना। फिलहाल, इस कदम ने यह साफ कर दिया है कि आरबीआई वैश्विक संकटों से निपटने के लिए बेहद आक्रामक और लीक से हटकर फैसले लेने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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