
तमिलनाडु के चुनाव (सौ.डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: गृहमंत्री अमित शाह की सहमति से बीजेपी के एक प्रतिनिधि ने पीएमके के संस्थापक एस.रामदास से उनके चेन्नई स्थित निवास पर मुलाकात की और उन्हें उनके बेटे अंबुमणि के पीएमके गुट से अधिक सीट देने की पेशकश की।इसका अर्थ यह है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी हर संभव कोशिश कर रही है कि रामदास एनडीए में शामिल हो जाएं।रामदास के बेटे अंबुमणि ने अपने पिता से अलग होकर अलग पीएमके गुट गठित कर लिया है, जिसे अन्ना द्रमुक व बीजेपी गठबंधन ने न सिर्फ स्वीकार कर लिया है बल्कि उसे उसकी पसंद की सीटें भी आवंटित कर दी हैं।इस बात से रामदास नाराज हैं।
चूंकि तमिलनाडु के एक वर्ग में रामदास की अच्छी पकड़ है, इसलिए बीजेपी उन्हें अपने साथ लाने की कोई कसर नहीं छोड़ रही है।पीएमके के साथ वही हुआ है, जो महाराष्ट्र में शिवसेना व एनसीपी के साथ हुआ था।पार्टी दो फाड़ हुई, असली पार्टी किसकी है और किसके साथ है इस पर कानूनी विवाद है, लेकिन अन्ना द्रमुक व बीजेपी ने अंबुमणि की पीएमके को ‘असली’ के रूप में स्वीकार कर लिया है।रामदास को तमिलनाडु की राजनीति में अय्या कहकर पुकारा जाता है,अय्या से यह भी कहा गया है कि उन्हें न तो अपने बेटे के साथ मंच साझा करने के लिए कहा जाएगा और न ही अंबुमणि के प्रत्याशियों के लिए प्रचार करने को कहा जाएगा।इसके अतिरिक्त बीजेपी ने अय्या को विश्वास दिलाया है कि उनके प्रत्याशी पीएमके के मूल चुनाव चिन्ह आम पर चुनाव लड़ सकेंगे।
अय्या से यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘इच्छा’ है कि वह एनडीए में शामिल हो जाएं।रामदास ने इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए चार दिन का समय मांगा है।पीएमके ने 2021 के विधानसभा चुनाव में एनडीए का हिस्सा रहते हुए 23 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से उसने 5 पर जीत हासिल की थी।रामदास एनडीए में लौटेंगे? मुश्किल लगता है।वह अपनी पार्टी तोड़े जाने व अन्य कारणों से अपने बेटे अंबुमणि से बहुत नाराज हैं।अन्ना द्रमुक व बीजेपी द्वारा अंबुमणि को नेता मानने से आग में घी का काम किया है।रामदास यह भी जानते हैं कि किस तरह बड़ी मछली (बीजेपी) छोटी मछलियों (अकाली दल, शिवसेना आदि) को खा जाती है।
रामदास ने हाल ही में स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार की तारीफ की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह पाला बदलने पर विचार कर रहे हैं।हालांकि रामदास का खेमा द्रमुक के संपर्क में है, लेकिन उसके विकल्प सीमित हो सकते हैं, क्योंकि वहां थोई थिरुमावालावन की वीसीके मौजूद है,जिससे पीएमके की कट्टर प्रतिद्वंदिता है।थिरुमावालावन ने निरंतर दोहराया है कि वह उस गठबंधन का हिस्सा कभी नहीं हो सकते, जिसमें पीएमके और बीजेपी शामिल हों।लेकिन रामदास का कहना है कि राजनीति में कुछ भी हो सकता है।अब सियासत में एकमात्र लक्ष्य सत्ता पाना रह गया है, न कोई दोस्त है और न कोई दुश्मन या प्रतिद्वंदी।फिलहाल एक तरफ द्रमुक (स्टालिन), वीसीके (थिरुमावालावन), एमएनएम (कमल हासन), एमडीएमके (वायको), वामपंथी व कांग्रेस हैं और मुकाबले पर अन्ना द्रमुक (ईपीएस), पीएमके (अंबुमणि) और बीजेपी हैं।
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बीजेपी चाहती है कि एएमएमके (दिनाकरन) डीएमडीके (दिवंगत एक्टर विजयकांत की पार्टी) और पीएमके (रामदास) एनडीए में लौट आएं।सबकी निगाहें स्टालिन की तरफ हैं कि वह 2021 को दोहरा सकते हैं या नहीं जब उनकी द्रमुक ने 173 में से 133 सीटों पर जीत दर्ज की थी।लेकिन बिना सुपरस्टार के तमिलनाडु के चुनाव होते नहीं हैं, इसलिए दोनों गठबंधन विजय की टीवीके पार्टी को अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रहे हैं।
तमिलनाडु के चुनाव ब्लॉकबस्टर फिल्म की तरह होते हैं. रंगीन, तीखे संदेश और एल्फा स्टार्स. अनेक पार्टियों की स्थापना फिल्मी सितारों ने की. विजय नवीनतम हैं बल्कि इस वजह से भी कि लोगों तक राजनीतिक विचार पहुंचाने में सिनेमा सशक्त माध्यम रहा है. तमिलनाडु विधानसभा की 234 सीटों के लिए चुनाव बहुकोणीय होने के नाते अधिक दिलचस्प होते हैं. छोटी-छोटी पार्टियों का महत्व बढ़ जाता है. रामदास की पीएमके को अपनी ओर खींचने के प्रयासों की यही वजह है।
लेख- शाहिद ए चौधरी के द्वारा






