संपादकीय: जनगणना में OBC की उपेक्षा किसलिए?

OBC Government Policy: परिवार सर्वेक्षण से ओबीसी को बाहर रखने पर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार के वादों के विपरीत यह कदम जातिगत जनगणना की मंशा पर संदेह पैदा करता है।
Editorial: Why is the OBC community being neglected in the census?
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
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नवभारत डिजिटल डेस्क: खिर ओबीसी के साथ सौतेला व्यवहार क्यों हो रहा है? केंद्र सरकार ने गत 22 जनवरी को जारी अधिसूचना में पारिवारिक सर्वेक्षण में ओबीसी प्रवर्ग का समावेश नहीं किया। इसका अर्थ है कि जातिगत जनगणना नहीं होगी। जब चुनाव सामने होता है तो कोई भी पार्टी अनेक प्रलोभन देती है। कुछ वर्गों को आश्वासन दिए जाते हैं, उनके बल पर जीत हासिल की जाती है और बाद में पीठ फिरा ली जाती है।

गत 30 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि नई जनगणना जाति के अनुसार की जाएगी ताकि पता चले कि किस जाति की राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक स्थिति कैसी है। इतने पर भी जनगणना के प्रथम चरण में ओबीसी की उपेक्षा कर सरकार ने नए विवाद को जन्म दिया है। इस पर सरकार की दलील है कि प्रथम चरण में केवल परिवार की जानकारी एकत्र की जाएगी, जब प्रत्यक्ष जनगणना होगी तब उसमें ओबीसी प्रवर्ग को शामिल किया जाएगा।

यह बात हैरत में डालने वाली है। किसी भी जाति का पिछड़ापन उसकी आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक स्थिति से निश्चित होता है। ओबीसी के संदर्भ में यह जानकारी प्रथम चरण के दौरान लेने में कौन सा हर्ज है? यदि यह सूचना नहीं जुटाई गई तो ओबीसी किस आधार पर पिछड़े या उच्चवर्णीय माने जाएंगे? 2011 की जनगणना के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह सरकार ने ओबीसी की जानकारी संकलित की थी। तब अनुसूचित जाति व जमाति से अलग वर्ग को 'अन्य' का नाम देकर ओबीसी की जानकारी जुटाई गई थी।

इसमें भारी विसंगति देखी गई थी। इसलिए सरकार अभी ओबीसी की जानकारी घोषित नहीं कर रही है। उधर बीजेपी दावा करती है कि ओबीसी हमारे ही हैं। प्रधानमंत्री मोदी भी स्वयं को ओबीसी बताते हैं। ओबीसी को राजनीतिक व शैक्षणिक आरक्षण देने के बारे में अनेक राज्यों ने कानून बनाए हैं। उन्हें अदालत में चुनौती देने पर हर समय इंपीरिकल डाटा का मुद्दा सामने आया।

सरकार ने उसे जमा करने का प्रयास किया किंतु न्यायालय ने उस पर प्रश्नचिन्ह लगाया। अब यह एकत्र करने का अवसर जनगणना में मिल सकता है लेकिन सरकार न जाने क्यों ऐसा नहीं कर रही है। सत्ताधारियों को लगता है कि जाति के अनुसार जनगणना करने से हिंदू धर्म का मुद्दा कमजोर पड़ सकता है।

देश में जनगणना संबंधी कानून 1948 का है। इसमें केवल अनुसूचित जाति-जमाति व धर्म से संबंधी जानकारी दर्ज करने का प्रावधान है। यदि इसी आधार पर जनगणना की जाएगी तो सरकार की घोषणा का क्या होगा? 2013 में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि ओबीसी होने की वजह से मेरी आलोचना की जाती है। उनके इस क्यान के बाद ओबीसी में जागृति आई। इसके बाद ओबीसी वोटों के बल पर बीजेपी चुनाव जीतती रही।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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