
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
नवभारत डिजिटल डेस्क: ऐसे समय जब दावे किए जा रहे हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नौकरियों को समाप्त कर देगी और बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैल जाएगी, तभी इन्फोसिस और एक्सस्टेप के सहयोगी संस्थापक नंदन निलेकणी का यह सुझाव महत्वपूर्ण है कि भारत को एआई का इस्तेमाल जनता का जीवनस्तर सुधारने और वास्तविक आर्थिक मूल्य के सृजन के लिए करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश को दृढ़तापूर्वक एआई की दौड़ में आगे ले जाना होगा। इसका इस्तेमाल जीतने व रचनात्मक उपलब्धि हासिल करने की दिशा में करना होगा। निलेकणी की राय है कि एआई का उपयोग सरकारी सेवाओं, कृषि, वित्तीय सेवाओं, लॉजिस्टिक्स, न्यायपालिका तथा उद्यम संचालन में किया जा सकता है।
एआई को सुपर इंटेलिजेंस मानकर भयभीत या आशंकित होने की आवश्यकता नहीं है। पश्चिमी देशों में कहा जा रहा है कि एआई लोगों को निठल्ला बना देगी। लोग समुद्री तट पर जाकर आराम फरमाएंगे, डिजिटल वालेट का इस्तेमाल करेंगे और वीडियो गेम खेलते बैठेंगे, यह सब काल्पनिक दावे है।
समझदारी व समुचित नियंत्रण के साथ एआई का इस्तेमाल वरदान साबित हो सकता है। एआई की दौड़ उत्थान की ओर है, तो पतन की ओर भी ले जा सकती है। उसका गलत इस्तेमाल मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ सकता है तथा पारिवारिक व सामाजिक मूल्यों को ध्वस्त कर सकता है। विवेकहीन व्यक्ति अश्लील कंटेंट या पोर्नोग्राफी में रुझान दिखा सकते हैं या आलसी बन सकते हैं।
हमें ऐसी पीढ़ी तैयार करनी होगी, जो एआई के माध्यम से लोगों का जीवनस्तर ऊंचा उठाए और उन्हें वंचित या लाचार होने से बचाए। भारत में आधार कार्ड को कामयाबी दिलाने वाले निलेकणी ने कहा कि इससे देश के 1 अरब लोग लाभान्वित हो रहे हैं। यूपीआई से शून्य लागत में 20 अरब से अधिक लेन-देन होते हैं। एक सब्जी विक्रेता ट्रांजेक्शन फीस दिए बिना अपनी उपज बेचकर उसके दाम हासिल कर सकता है।
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लोग अल्गोरिदम का इस्तेमाल कर तीर्थयात्रा का ठिकाना तय करने लगे हैं। हमारे लिए उपयुक्त होगा कि अपनी जरूरतों व प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर चिप्स तैयार करें। आवाज पर आधारित एआई भारत में सबसे व्यावहारिक इंटरफेस है। यह डिजिटल इक्विटी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
जैसे यूपीआई ने डिजिटल पेमेंट को आसान कर दिया है, उसी प्रकार आवाज से संचालित होने वाले इंटरफेस कृषि, शिक्षा व अन्य क्षेत्रों में उपयोगी हो सकते हैं तथा हर नागरिक के लिए अवसरों में आने वाली बाधाएं मिटा सकते हैं। इसके लिए बहुत शिक्षित होना जरूरी नहीं है। भारत में प्रतिभा है तथा आधारभूत ढांचा तैयार कर कुछ वर्षों में एआई से जुड़े अवसरों का लाभ अनेक क्षेत्रों में उठाया जा सकता है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा






