BJP Tamil Nadu Strategy ( सोर्स: सोशल मीडिया )
BJP Tamil Nadu Strategy: विपक्षमुक्त भारत का स्वप्न देखने वाली बीजेपी के लिए नि तमिलनाडु और बंगाल के विधानसभा चुनाव काफी कठिन साबित हो सकते हैं। तमिलनाडु को राजनीति द्रविड़ अस्मिता के इर्द गिर्द घूमती है।
पिछले चुनाव के समय एआईएडीएमके से गठबंधन कर बीजेपी ने जैसे-तैसे अपना खाता खोला था। जयललिता के निधन के बाद से एआईएडीएमके की हालत दयनीय हो गई है।
थेवर समुदाय में प्रभाव रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम डीएमके में शामिल हो गए हैं। शशिकला नटराजन ने अपनी अलग पार्टी बना ली है। एआईएडीएमके के पास केवल ई।
पलानीस्वामी ही एकमात्र चेहरा बचे हुए हैं। इसे देखते हुए अब बीजेपी अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के साथ युति का प्रयास कर रही है जबकि विजय ने युति की संभावना से इनकार किया है।
गत सितंबर माह में कुरूर में विजय की रैली में भगदड़ मौतें, पुराने आयकर प्रकरण के जरिए बीजेपी विजय पर युति के लिए दबाव बना सकती है।
हिंदी के मुद्दे पर भी तमिलनाडु में बीजेपी का विरोध है, ऐसे आसार हैं कि एआईएडीएमके को पीछे छोड़कर विजय की पार्टी टीवीके तमिलनाडु में प्रमुख विपक्षी दल बन सकती है।
तमिलनाडु के समान ही बीजेपी के लिए बंगाल में भी सांस्कृतिक, भाषाई अस्मिता की कड़ी चुनौती है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का बंगाल में प्रभाव दिखाई दिया लेकिन 2024 के लोकसभा निर्वाचन में बीजेपी अपनी सफलता दोहरा नहीं पाई।
बीजेपी व टीएमसी दोनों एक-दूसरे को चेतावनी देती हैं व आरोप-प्रत्यारोप लगाती रहती हैं। बीजेपी को उम्मीद है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से अवैध नाम हटाए जाने का फायदा उसे मिलेगा।
ममता बनर्जी के आक्रामक प्रचार से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री अमित शाह सहित बीजेपी के सारे शीर्ष नेता इस बार भी जोर लगाएंगे। इस चुनाव में एसआईआर के मुद्दे को लेकर ममता सड़कों पर जाएंगी तथा चुनाव आयोग पर गुस्सा निकालेंगी, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की पहल की है।
बीजेपी को अपनी प्रतिष्ठा कायम रखने के लिए इस चुनाव में उल्लेखनीय सफलता हासिल करनी होगी, केरल में वाममोर्चा (एलडीएफ) 2 टर्म पूरे कर चुका है।
क्या बीजेपी वहां के चुनाव पर प्रभाव डाल पाएगी? बीजेपी की सारी उम्मीद राजीव चंद्रशेखर से है जो संगठन कार्यों में निपुण रणनीतिकार माने जाते हैं। वह पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।
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पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के शशि थरूर को कड़ी चुनौती दी थी। कांग्रेस बी. डी. सतीशन पर निर्भर है जो केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। केरल के 81 वर्षीय मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के लिए इस चुनाव में हैट्रिक मारने का मौका है। उनका वाम मोर्चा राज्य में आधारभूत ढांचे के विकास तथा कल्याणकारी योजनाओं का श्रेय ले रहा है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा