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नवभारत विशेष: डरावनी रफ्तार से फैल रहा हंता वायरस, कैसी है हमारी इससे लड़ने की ताकत ?

Cruise Virus Alert: केप वर्डे के पास एमवी होडियस जहाज पर हंता वायरस प्रकोप के बाद 3 मौतें हुई हैं। जहाज के 2 भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं, स्वास्थ्य जांच जारी है।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: May 11, 2026 | 07:08 AM

हंता वायरस,(सोर्स: सौजन्य AI)

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Hantavirus Cruise Ship Outbreak: पश्चिम अफ्रीका के केप वर्डे के पास एक डच क्रूज जहाज, एमवी होडियस पर हंता वायरस का भयानक प्रकोप देखा गया है, जो कि दुर्लभ और डरावना है। इस घटना में अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है और 5 अन्य संक्रमित पाए गए हैं। जहाज के क्रू में 2 भारतीय भी हैं। उनके संक्रमित होने की आशंका है। कुल मिलाकर जहाज पर 23 देशों के 146 लोग अभी भी सवार हैं, जो कैनरी द्वीप की ओर बढ़ रहा है।

वहां पहुंचने पर यात्रियों की मेडिकल जांच की जाएगी और उसके बाद ही उन्हें घर भेजा जाएगा। इस घटना के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने 12 देशों में अलर्ट जारी किया है। अपने देश में हंता वायरस के पहले भी कुछ मामले प्रकाश में आए हैं, लेकिन त्वरित चिंता की आवश्यकता नहीं है। इंडियन जर्नल ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन में एक केस रिपोर्ट है, जिसमें बताया गया है कि मुंबई में एक महिला ने जब अपने बच्चे को जन्म दिया, तो उसके बाद उसमें हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम पाया गया।

पीएसआरआई इंस्टिट्यूट ऑफ पल्मोनरी क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन के प्रमुख डॉ. जीसी खिलनानी का कहना है, ‘कार्डियोपल्मोनरी (हृदय व फेफड़े संबंधी) हंता वायरस रोग में मृत्यु दर 30-50 प्रतिशत तक हो सकती है, लेकिन यह कोविड-19 की तरह अत्यधिक संक्रमित रोग नहीं है।

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सर गंगाराम अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एंड रिसर्च के प्रमुख डॉ. वी. के. गांगुली के अनुसार, कोविड-19 के बाद हेल्थकेयर सिस्टम अधिक तैयार है और अस्पतालों में हंता वायरस को पहचानने की क्षमता है। हंता वायरस कैसे फैलता है, इसके लक्षण क्या हैं और बचाव के तरीके क्या अपनाए जा सकते हैं? यह वायरस अक्सर चूहों से फैलता है।

यह चूहों के मल-मूत्र से हवा में फैल सकता है। चूहे या गिलहरी की लार के सीधे संपर्क में आने से भी यह फैलता है। यह कोई कट लगने से, आंखों के जरिए या चूहे के काटने से भी फैल सकता है। सांस के माध्यम से हवा में फैले कणों के संपर्क में आने पर इंसान हंता वायरस से संक्रमित हो सकते हैं।

यह वायरस दो गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है- नंबर 1, सांस लेने संबंधी समस्याएं व फेफड़ों को नुकसान यानी पल्मोनरी सिंड्रोम जिसमें फेफड़ों में पानी आ जाता है व सांस लेने में दिक्कत होने लगती हैं। नंबर 2, इंटरनल ब्लीडिंग व किडनी फेलियर की शुरुआत फ्लू जैसी लगती है, जो आगे चलकर गुर्दे पर असर डालती है और लो ब्लड प्रेशर, शरीर के अंदर रक्तस्त्राव व गुर्दे के पूरी तरह फेल होने का कारण बन सकती है।

संक्रमित होने पर व्यक्ति में यह लक्षण दिखाई देते हैं- थकान, बुखार, मांसपेशियों में दर्द और फिर इसके बाद सिरदर्द, चक्कर आना, कंपकंपी और पेट की समस्याएं होती हैं। सांस लेने में गंभीर कठिनाई हो, तो इस स्थिति में मरीज को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, इस बीमारी का इन्क्यूबेशन पीरियड (रोग के पनपने का समय) भी एक मुश्किल पैदा करने वाला पहलू है, इसके लक्षण दिखने में 1 से 8 हफ्ते तक का वक्त लग सकता है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित मरीजों को अलग रखना, नियमित रूप से हाथ थोना, मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंस बनाए रखना। इस बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए बहुत अहम हैं। गौरतलब है कि हंता वायरस संक्रमण के लिए कोई विशेष इलाज नहीं है, लेकिन शुरुआती चरण में मिले उपचार से रोगी के ठीक होने की काफी हद तक संभावना रहती है। इसके लिए सुझाए गए उपचारों में ऑक्सीजन थेरेपी, मैकेनिकल वेंटिलेशन और यहां तक कि डायलेसिस भी शामिल हो सकता है। वैसे इसके इलाज के नए तरीकों का ट्रायल भी चल रहा है।

कैसी है हमारी इससे लड़ने की ताकत ?

अभी इस वायरस से बचने के लिए कोई भी वैक्सीन बड़े पैमाने पर उपलब्ध नहीं है, जबकि चीन व दक्षिण कोरिया में इस वायरस के उन स्ट्रेन के खिलाफ कुछ वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बावजूद एंडीज वायरस, जो जहाज पर पाया गया, गंभीर चुनौती है, क्योंकि यह इंसान से इंसान में फैल सकता है और इससे संक्रमित होने वालों में मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत है, जो कोविड-19 की तुलना में बहुत अधिक है।

लेख- नौशाबा परवीन के द्वारा

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Published On: May 11, 2026 | 07:08 AM

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