

Bride Arrives with Baraat: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, परंपरानुसार दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर शादी करने जाता है और बारात हमेशा वर पक्ष की ओर से निकलती है लेकिन अमरावती में एक दुल्हन खुद सजे-धजे हाथों पर सवार होकर अपनी बारात लेकर विवाह करने वर पक्ष की ओर पहुंची। आप चाहें तो इसे स्वयंवर की आधुनिक मिसाल कह सकते हैं। महिला अधिकार कार्यकर्ता अवश्य ही इस दुल्हन की दिलेरी का दिल खोलकर स्वागत या अभिनंदन करेंगे।'
हमने कहा, 'नववधु लक्ष्मी का रूप मानी जाती है। गृहलक्ष्मी हाथी पर सवार होकर आए तो अत्यंत ऐश्वर्य की बात है। आपने ऐसा चित्र देखा होगा जिसमें महालक्ष्मी के अगल-बगल 2 हाथी अपनी सूंड से पानी की बौछार कर उनका जलाभिषेक कर रहे हैं। इन्हें गजलक्ष्मी कहा जाता है। वैसे 8 प्रकार की लक्ष्मी बताई गई हैं जिनके नाम हैं- आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, धैर्यलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी और राज्यलक्ष्मी,'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हमें लगता है कि इस समय देश के अधिकांश राज्यों में शासन करने वाली बीजेपी के पास राज्यलक्ष्मी है और तमिलनाडु में टीवीके नेता-अभिनेता विजय पर विजयलक्ष्मी की अनुकंपा है।'
हमने कहा, 'हर बात में राजनीति मत लाइए, अमरावती जिले के कौडिन्यपुर स्थित रुक्मिणी विदर्भपीठ के स्वामी राजेश्वराचार्य माउली सरकार की गोद ली हुई पुत्री के भव्य विवाह समारोह की यह घटना है जिसमें दुल्हन हाथी पर विराजमान हुई। साथ में देश के भिन्न स्थानों से आए साधु और महंत इस बारात में शामिल हुए। इस शादी में दक्षिण भारत से बैंड लाया गया था। ऐसा बैंड-बाजा बारात का भव्य नजारा पहली बार अमरावती वासियों ने देखा।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, आपने कौडिन्यपुर का नाम लिया। वहां द्वापर युग में विदर्भ नरेश भीष्मक की राजधानी थी। वहां की राजकुमारी रुक्मिणी ने मन ही मन श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था। जब रुक्मिणी का भाई रुक्मी उसका विवाह अपने मित्र शिशुपाल से कराना चाहता था तो रुक्मिणी ने भूदेव ब्राह्मण के हाथों द्वारकाधीश श्रीकृष्ण को प्रेमपत्र भेजा और निवेदन किया कि वह अतिशीघ्र आकर उनका हरण कर लें। श्रीकृष्ण ने ऐसा ही किया। रुक्मिणी लक्ष्मी का अवतार थी।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा