Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • मध्य प्रदेश
  • विदेश
  • चुनाव
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

नवभारत विशेष: देश को वायुरक्षा प्रणाली सुदर्शन चक्र का इंतजार, इजराइल के आयरन डोम से बेहतर होगा

Sudarshan Chakra Mission: मिशन सुदर्शन चक्र भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा योजना है, लेकिन उपग्रह लॉन्च और तकनीकी प्रगति में देरी कई सवाल खड़े कर रही है।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Apr 30, 2026 | 07:18 AM

मिशन सुदर्शन चक्र,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)

Follow Us
Close
Follow Us:

India Integrated Air Defense: जिस मिशन सुदर्शन चक्र को भारत के अपने हाईटेक एयर डिफेंस अंब्रेला के तौर पर देखा जा रहा है, जो दुश्मन की मिसाइलों, ड्रोन और एयरक्राफ्ट को गंभीर खतरा पैदा करने से पहले ही खत्म कर देगा, ऐसे महत्वपूर्ण मिशन के प्रति इतना दीलापन क्यों? इसके लिए कई तरह के रडारों की स्थापना और 52 से ज्यादा उपग्रहों के प्रक्षेपण के साथ स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली कुशा एवं रूसी एयर डिफेंस सिस्टम एस 400 के साथ इसके इंट्रीग्रेशन के अलावा कुछ अन्य तकनीकी व्यवस्था और प्रबंध करने की प्रगति धीमी क्यों है? 52 उपग्रहों में एक भी लॉन्च क्यों नहीं हुआ? मिशन सुदर्शन चक्र का आधार है स्पेस एयर डिफेंस कमांड।

यह थियेटर कमांड कब तक तैयार होगा? 15 अगस्त 2025 को दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चोषित ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ ने भारतीय सुरक्षा चिंतन में एक बड़े मोड़ का संकेत दिया। लक्ष्य है ऐसा बहु-स्तरीय, स्वदेशी, एकीकृत वायु एवं मिसाइल-रक्षा तंत्र खड़ा करना, जो न केवल सैन्य ठिकानों बल्कि रणनीतिक परिसंपत्तियों, नागरिक बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय कमांड नेटवर्क को भी सुरक्षित कर सके। सुदर्शन चक’ एक अकेला सिस्टम नहीं, ‘सिस्टम ऑफ सिस्टम्स है।

इसमें लंबी दूरी की सतह से वायु मिसाइलें, रडार नेटवर्क, कमान एवं नियंत्रण, काउंटर यूएएस, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष-आधारित निगरानी और संभवतः भविष्य में स्पेस-कमांड तथा साइबर कमांड जैसी संस्थागत संरचनाएं शामिल होंगी। बड़ी रक्षा परियोजनाएं पहले नीति, फिर स्वीकृति, तब परीक्षण, उसके बाद उत्पादन और अंततः संयुक्त तैनाती के चरणों में ही आगे बढ़ती हैं।

सम्बंधित ख़बरें

नवभारत निशानेबाज: खुश हैं क्रिकेट के सारे फैन, सिक्सर मार रहे हैं हिटमैन

पीएम मोदी ने हरदोई से किया गंगा एक्सप्रेसवे को लोकार्पण, बोले- शिलान्यास भी हम करते हैं और उद्घाटन भी

Ganga Expressway: गूगल मैप्स पर अभी क्यों नहीं दिख रहा गंगा एक्सप्रेसवे? जानिए मुख्य वजह

29 अप्रैल का इतिहास: लाल किले की नींव से बकिंघम पैलेस तक, आज का दिन विरासत और गौरव का प्रतीक

52 निगरानी उपाहों में से 21 इसरो और 31 निजी कंपनियां विकसित करने की मंजूरी है। पूरी श्रृंखला 2029 तक लॉन्च करने का लक्ष्य है। अब 52 उपग्रहों को एक के बाद एक रवाना किया जा सके ऐसा नहीं है। उपग्रहों के पेलोड, कक्षा, ग्राउंड सेगमेंट, डाटा-प्रोसेसिंग और सैन्य-इंटीग्रेशन की पूरी श्रृंखला व्यवहारिक रूप से सघन तालमेल मांगती है, इसलिए इसमें भी विलंब स्वाभाविक है।

प्रोजेक्ट कुशा को डीआरडीओ लंबी दूरी के स्वदेशी सतह से वायु मिसाइल डिफेंस स्सिस्टम के रूप में विकसित कर रहा है। यह भविष्य में एस-400 जैसी विदेशी प्रणाली पर निर्भरता घटाएगा, मिशन के तहत पूरे देश में रडारों का एक ऐसा जाल बनाना है, जो इतना घना हो कि इसकी नजर में आए कोई भी दुश्मन मिसाइल या ड्रोन निकल न सके।

मिशन सुदर्शन चक्र की पूर्णता के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है स्पेस और एयर कमांड का जल्दी बनना। एकीकृत डिफेंस प्रोग्राम जिसका लक्ष्य बल, जल और नभ की ताकतों को ‘स्पेस-आधारित डाटा’ से जोड़ना है। आज देश के पास इसके लिए आवश्यक कुछ संस्थागत ढांचे पहले से मौजूद हैं, जैसे डिफेंस स्पेस एजेंसी, एकीकृत सैन्य कार्यवल, वगैरह लेकिन ‘पूर्ण विकसित’ स्पेस कमांड अभी एक अवधारणा से आगे बढ़कर भिन्न ऑपरेशनल कमांड नहीं बना है। यही बात साइबर कमांड पर भी लागू होती है।

बिना इन कमानों के डाटा-फ्यूजन, सेंसर-शेयरिंग और तेज निर्णय-चक्र सीमित रहेंगे। इसलिए सुदर्शन चक्र की सफलता का सबसे बड़ा कमान-एकीकरण होगा। क्योंकि आधुनिक युद्ध में समय की बचत ही सुरक्षा की असली परिभाषा है। सुदर्शन चक्र परियोजना की सबसे बड़ी सीमा तकनीक नहीं, समय और औद्योगिक स्केल है।

हमने रक्षा उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की है, लेकिन बड़े ‘सिस्टम ऑफ सिस्टम्स’ जैसे कार्यक्रमों में गुणवत्ता, मानकीकरण और समय पालन कहीं अधिक कठिन होता है। डीआरडीओ, इसरो, वायुसेना, आएडीएस, निजी अंतरिक्ष कंपनियां और बीईएल जैसी एजेंसियां अगर अलग-अलग गति से चलेंगी तो देरी स्वाभाविक है।

यह भी पढ़ें:-नवभारत निशानेबाज: खुश हैं क्रिकेट के सारे फैन, सिक्सर मार रहे हैं हिटमैन

कुशा परियोजना, काउंटर ड्रोन, रडार घनत्व, स्पेस बेस्ड सर्विलांस और कमांड इंटीग्रेशन, ये सब साथ में चलेंगे, निरंतर वित्त पोषण, स्वदेशी विकास की तीव्र समय सीमा, तीनों सेनाओं का गहन एकीकरण और निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी भरपूर होगी तो सुदर्शन चक्र’ देर सवेर अवश्य आकार लेगा।

इजराइल के आयरन डोम से बेहतर होगा

सुदर्शन चक्र को भारत का आयरन डोम कहना ठीक नहीं। यह उससे कहीं आगे की तकनीक है, जिसमें इजराइली गोल्डन डोम तथा रूसी तुंद्रा की तरह मिली-जुली खासियतें होंगी। यह ढाल और तलवार की तरह बचाव और हमला दोनों काम करेगा।

लेख- संजय श्रीवास्तव के द्वारा

Mission sudarshan chakra india air defense system progress delay

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Apr 30, 2026 | 07:18 AM

Topics:  

  • Hindi News
  • Narendra Modi
  • Navbharat Editorial

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.