

Mumbai News: उद्योग समूहों और लघु उद्योगों के लिए लाभकारी देश की पहली ‘एआई लिविंग लैब’ महाराष्ट्र में शुरू की गई है। राज्य के कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा और जर्मनी की संसदीय राज्य मंत्री डॉ. बार्बेल कॉफ्लर की उपस्थिति में महाराष्ट्र राज्य रतन टाटा कौशल्य विश्वविद्यालय के मुख्यालय में इस लैब का उद्घाटन किया गया। यह जर्मनी के सहयोग से शुरू किया गया विश्वविद्यालय का एक अभिनव उपक्रम है।
मंत्री लोढ़ा ने कहा कि प्राचीन भारत में उद्योगों में उन्नत तकनीक के उपयोग के अनेक उदाहरण मिलते हैं। छोटे उद्योगों के बल पर ही भारत एक समृद्ध राष्ट्र के रूप में विश्व व्यापार करता था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी की अवधारणा को मजबूत करते हुए कोरोना संकट के दौरान 75 से अधिक देशों को स्वदेशी वैक्सीन उपलब्ध कराकर वैश्विक मैत्री की भूमिका निभाई।
अब आधुनिक तकनीक को भारत में लाकर स्वदेशी उद्योगों को गति देने का प्रयास किया जा रहा है। जर्मनी के सहयोग से शुरू हो रहा ‘एआई लिविंग लैब’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्वदेशी उद्योगों को तकनीक का साथ मिलने से भारत निश्चित रूप से वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगा।
जर्मनी की संसदीय राज्य मंत्री डॉ. कॉफ्लर ने कहा कि मानवता के भविष्य को आकार देने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके सही उपयोग से विज्ञान की जटिल समस्याओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान संभव होगा। वहीं राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि एआई एक औद्योगिक क्रांति के समान है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था की संरचना और कार्यप्रणाली में मूलभूत बदलाव ला रही है।
कुलपति डॉ. अपूर्वा पालकर ने बताया कि यह उपक्रम उद्योग, विश्वविद्यालय और महाराष्ट्र सरकार को एक मंच पर लाकर वास्तविक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान खोजने का काम करेगा। जर्मनी की पांच कंपनियां इस लैब को सहयोग देंगी। महाराष्ट्र की एक्युरेट इंडस्ट्रियल कंट्रोल्स लिमिटेड, लाइटेक्स इलेक्ट्रिकल, अश्विनी मैग्नेट्स और पीएमटी मशीन ने विश्वविद्यालय के साथ समझौता किया है।