संपादकीय: असुरक्षित होती जा रहीं देश की सड़कें

Road Safety In India: भारत में सड़क दुर्घटनाएं बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। जानें हादसों के कारण, 1.6 लाख मौतों का सच, सरकार की 2030 तक 50% कमी की योजना और सड़क सुरक्षा के उपायों के बारे में जानें।
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सड़क दुर्घटना (सौ. डिजाइन फोटो)
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नवभारत डिजिटल डेस्क: भारत में सड़कें असुरक्षित हैं, जहां जिंदगी कभी भी खतरे में पड़ सकती है। प्रति वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में औसतन 1।6 लाख लोग जान गंवा बैठते हैं। किसी युद्ध या महामारी में मरने वालों की तुलना में यह संख्या ज्यादा है। सड़क परिवहन व महामार्ग मंत्रालय ने सेव लाइफ फाउंडेशन नामक एनजीओ के सहयोग से 15 राज्यों में कई जिलों व 18 कोरिडॉर की पहचान की है, जहां सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। सरकार ने 2030 तक सड़कों पर होने वाली मौत में 50 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य रखते हुए डाटा आधारित शून्य दुर्घटना कार्यक्रम शुरू किया है।

सड़कों की दोषपूर्ण डिजाइन, गलत किस्म के मोड़, संकेत चिन्ह की गैरमौजूदगी, अंधकार व्याप्त रहना, गलत ड्राइविंग आदतों तथा कानून में ढील को दुर्घटनाओं की वजह माना गया है। सड़क दुर्घटना में लगभग दो-तिहाई मौत राज्य महामार्गों, जिला सड़कों व स्थानीय सड़कों पर होती हैं। देश के 100 जिलों में 2023 व 2024 में सड़क दुर्घटनाओं में 89,000 लोगों की मौत हुई। मिसफिट और पुराने वाहन भी दुर्घटना का कारण बनते हैं। लापरवाही से गाड़ी चलाना, हेलमेट नहीं पहनना, तेज रफ्तार से भी हादसे होते हैं। आगे निकलने की जल्दबाजी, असावधानी से ओवरटेकिंग से भी अनहोनी होती है। शहरों में सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में रखे जाएं और यातायात नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए जुर्माना बढ़ाना होगा।

सड़कों पर रेस लगाने वाले या स्टंट करने वालों पर कानून का भय होना चाहिए। आवारा पशुओं का जमघट और गड्डों की बहुतायत भी दुर्घटना की वजह बनती है। बड़े चौराहों पर रोटरी लगाई जाए ताकि वाहनों को घूमकर अपनी दिशा में जाना पड़े। लोगों को लेन सिस्टम समझना चाहिए। अचानक लेन तोड़कर टर्न लेने वाले अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं। जिन स्थानों पर दुर्घटना की आशंका है, वहां समीप ही ट्रामा सेंटर खोले जाएं। जनता को भी चाहिए कि तमाशबीन बनकर रील बनाने की बजाय घायल को शीघ्र अस्पताल ले जाएं ताकि उसकी जान बचाई जा सके।

शहरों में उड़ानपुल, अंडरपास आदि का निर्माण निर्धारित समय में पूरा हो ताकि यातायात सुगमता से हो सके। करोड़ों रुपये खर्च करके बनाए जाने वाले अंडरब्रिज में यदि अंधेरा रहेगा, पानी व कीचड़ फैला रहेगा तो सुविधा की बजाय दुर्घटना होने का खतरा बढ़ जाता है। जहां भी टर्निंग है वहां स्पष्ट संकेत सिग्नल चालू रहने चाहिए। केंद्र, राज्य की सरकारें व स्थानीय प्रशासन समन्वित रूप से सड़क सुरक्षा के उपाय करें तो अमूल्य मानव प्राणों की रक्षा हो सकती है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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