नवभारत संपादकीय: लोकलुभावन योजनाओं का असर, आर्थिक संकट गहराया; हिमाचल में वेतन कटौती और भत्तों पर रोक

Himachal Fiscal Crisis: लोकलुभावन योजनाओं के दबाव में हिमाचल की आर्थिक हालत बिगड़ी। कर्ज बढ़ा, वेतन कटौती और भत्तों पर रोक जैसे कड़े फैसले लेने पड़े।
Navbharat Editorial: The Impact of Populist Schemes—Economic Crisis Deepens; Salary Cuts and Freeze on Allowances in Himachal
सुखविंदर सिंह सुक्खू , भगवंत मान सरकार,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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Populist Schemes Budget Impact: लोक लुभावन योजनाओं को लागू करने से राज्यों का बजट बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। हिमाचल प्रदेश इसका भुक्तभोगी है, कांग्रेस शासित इस राज्य में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के वेतन में 30 प्रतिशत, सचिव तथा अन्य अधिकारियों के वेतन में अगले 6 महीने के लिए 20 प्रतिशत कटौती का निर्णय लिया गया।

मंत्रियों व विधायकों के वेतन में पहले ही कटौती की जा चुकी है। विधायक निधि पर भी रोक लगाई गई सरकारी है। सभी कर्मचारियों की वेतनवृद्धि स्थगित करने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका है। हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने से ग्राम पंचायत चुनाव टालने की नौबत आ गई।

हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य पर 1 लाख करोड़ रुपए कर्ज का बोझ है। इस कर्ज की 74 प्रतिशत रकम पुराने कर्ज व उसका व्याज अदा करने में खर्च होती है। रिजर्व बैंक का नियम है कि राजस्व से मिलने वाली आय की तुलना में कर्ज का अनुपात 25 प्रतिशत से कम रहना चाहिए लेकिन हिमाचल प्रदेश में कर्ज का अनुपात 40 प्रतिशत पर चला गया है।

इस राज्य की सत्ता हासिल करते ही कांग्रेस सरकार ने रिजर्व बैंक व कैग की चेतावनी की उपेक्षा करते हुए पुरानी पेंशन योजना लागू करने का 2022 में दिया गया वादा पूरा किया। इससे उसका आर्थिक नियोजन गड़बड़ा गया। इसके अलावा महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश की लाड़ली बहन योजना के समान हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने 'इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि योजना' लागू कर महिलाओं को हर माह 1,500 रुपए देने शुरू किए। गत 3 वर्षों से राज्य में अतिवृष्टि से घरों, संपत्ति को भारी नुकसान हुआ और सड़कें उखाड़ गई। राज्य में कांग्रेस की सरकार होने से केंद्र से अधिक मदद नहीं मिल पा रही है।

पंजाब की आर्थिक स्थिति पर भी लोकप्रिय घोषणाओं का असर पड़ा है। राज्य की आय की तुलना में कर्ज का अनुपात 46 प्रतिशत पर चला गया है। भगवंत मान सरकार ने 300 यूनिट तक बिजली मुफ्त कर दी है, इसलिए 90 प्रतिशत ग्राहकों को बिजली बिल आता ही नहीं। पंजाब सरकार ने घोषित किया है कि जुलाई से हर माह सामान्य वर्ग की महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए तथा अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपए भत्ता दिया जाएगा।

पंजाब की आप सरकार की गंभीर आर्थिक स्थिति पर नीति आयोग ने चिंता व्यक्त की है। रिजर्व बैंक तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं के अनुसार लुभावनी योजनाओं से राज्य का आर्थिक संकट बढ़ता जा रहा है।

महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति बेहतर होने के बावजूद उस पर भी ऐसी लोकप्रिय योजनाओं की वजह से सरकारी खजाने पर भार बढ़ता चला जा रहा है। लुभावनी योजनाओं की जरूरत इसलिए भी पड़ती है क्योंकि बड़ी आबादी को नौकरी या रोजगार नहीं दिया जा सकता। चुनाव के समय प्रायः सभी राज्यों में हर पार्टी ऐसी घोषणा करती है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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