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संपादकीय: दिल्ली दंगा प्रकरण में अब मुकदमा शुरू हो

Sharjeel Imam UAPA: दिल्ली दंगों में उमर खालिद और शरजिल इमाम को जमानत से इनकार पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला चर्चा में है। यूएपीए, लंबी हिरासत और न्यायिक तर्कों का विश्लेषण।

  • By दीपिका पाल
Updated On: Jan 07, 2026 | 12:46 PM

दिल्ली दंगा प्रकरण (सौ. डिजाइन फोटो)

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नवभारत डिजिटल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं कहा था कि जमानत नियम है जबकि जेल अपवाद है।इसके बावजूद दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तारी के बाद 5 वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने पर भी उमर खालिद और शरजिल इमाम को जमानत पर रिहा करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया।क्योंकि प्रथम दृष्ट्या उन पर मामला बनता है।यूएपीए जैसे कठोर कानून में जमानत देना वैसे भी चुनौतीपूर्ण है।अदालत ने 5 सहअभियुक्तों की जमानत मंजूर कर ली जो इतने वर्षों से मुकदमा शुरू हुए बिना जेल में थे।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि आतंक के मामलों में भी जब ऐसा लगे कि समय रहते मुकदमा नहीं चल पाएगा तो जमानत की शर्तों में नरमी बरती जानी चाहिए।लगता है अदालत ने अभियोजन के इस दावे को माना है कि खालिद और इमाम ने अपराध में केंद्रीय भूमिका निभाई जबकि बाकी अभियुक्त केवल साजिश में सहयोगी रहे।अदालत ने अपनी यह राय साक्ष्य की मजबूती के आधार पर नहीं बनाई बल्कि अभियोजन के नैरेटिव पर बनाई।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गवाहों से जिरह हो जाने के बाद या आज से 1 वर्ष उपरांत खालिद व इमाम जमानत मांग सकते हैं।

इस तरह जांच एजेंसी को इन दोनों आरोपियों के खिलाफ दिल्ली दंगे की साजिश रचने का आरोप सिद्ध करने या न्यायालय के सामने गवाहों से जिरह कर मामला सिद्ध करने के लिए 1 वर्ष की मुद्दत है।ऐसे में मामला शीघ्र ही शुरू किया जाना उपयुक्त रहेगा।जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकार द्वारा बनाए गए नागरिकता (संशोधन) कानून के खिलाफ इन दोनों आरोपियों ने दिल्ली में दंगे की चेतावनी दी थी।एक गुप्त बैठक में सरकार के खिलाफ साजिश रची गई थी व देशविरोधी नारे लगाए गए थे।फरवरी 2020 में विभिन्न धर्मों के 53 लोग दंगों में मारे गए थे।इस संबंध में गिरफ्तार 17 लोगों में से किसी को भी जमानत नहीं देने की मांग सालिसिटर जनरल तुषार मेहता व अन्य सरकारी वकीलों ने की थी।

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इस मामले में विधिवत मामला शुरू ही नहीं हुआ।17 आरोपियों में जेएनयू तथा जामिया मिलिया के छात्र शामिल हैं।सभी को यूएपीए व आर्म्स एक्ट में आरोपी बनाया गया है।यूएपीए की धारा 43 में न्यायाधीश को आरोप में प्रथमदर्शनी तथ्य नजर आने पर कितने ही समय तक बगैर मामला चले जेल में रखने तथा जमानत से इनकार करने का अधिकार 2008 से है।यूएपीए की धारा 35 में 2019 में किया गया संशोधन केवल संगठन नहीं बल्कि व्यक्ति को भी आतंकवादी करार देने की छूट सरकार को देता है।

इतने कठोर कानून के बाद भी यदि कुछ लोगों को जमानत मिली तो क्या इसे जांच एजेंसी की विफलता कहना होगा? इस मामले में देवांगन कलीता व नताशा नावाल के बाद आसिफ इकबाल को 2021 में जमानत मिली।गुलफिशा फातिमा, मीरा हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान व शादाब अहमद को 12 शर्तों के साथ जमानत दी गई।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

Delhi riots umar khalid sharjeel imam bail supreme court uapa

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Published On: Jan 07, 2026 | 12:46 PM

Topics:  

  • Delhi Blast
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