धनुष बाण पर आज सुनवाई (डिजाइन फोटो)
Uddhav Thackeray vs Eknath Shinde SC: महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाले सबसे बड़े कानूनी विवाद, यानी शिवसेना नाम और ‘धनुष-वाण’ चुनाव चिह्न मामले पर गुरुवार (12 मार्च) को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के नेतृत्व वाली खंडपीठ के समक्ष यह मामला कार्यसूची में 40वें नंबर पर सूचीबद्ध है।
यह कानूनी संघर्ष जून 2022 में हुए उस राजनीतिक भूकंप का नतीजा है, जिसने महाराष्ट्र की सत्ता पलट दी थी। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 40 विधायकों की बगावत के बाद, केंद्रीय चुनाव आयोग ने फरवरी 2023 में शिंदे गुट को ‘असली शिवसेना’ मानते हुए नाम और चुनाव चिह्न उन्हें सौंप दिया था। उद्धव ठाकरे ने इस फैसले को लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
इस मामले में केवल पार्टी का नाम व चुनाव चिह्न ही दांव पर नहीं है, बल्कि विधायकों की सदस्यता भी अधर में है। विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने शिंदे गुट के विधायकों को पात्र ठहराया था। शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु ने इस निर्णय के खिलाफ अलग से याचिका दायर की है। कोर्ट चुनाव चिह्न और विधायकों की अयोग्यता, इन दोनों महत्वपूर्ण विषयों पर एक साथ सुनवाई कर सकता है।
इससे पहले यह सुनवाई 23 जनवरी (बालासाहेब ठाकरे की जयंती) को होनी थी, लेकिन प्रशासनिक कारणों और अन्य मामलों की व्यस्तता के चलते इसे आगे बढ़ा दिया गया था। नवंबर 2025 में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि वह अब अंतिम दलीलों को सुनने के लिए तैयार है।
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महाराष्ट्र की जनता और देश के राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कोर्ट चुनाव आयोग के उस फैसले को पलटेगा जिसने संख्याबल के आधार पर शिंदे गुट को मान्यता दी थी। उद्धव ठाकरे का तर्क है कि जब तक विधायकों की अयोग्यता का मुद्दा नहीं सुलझता, तब तक संख्याबल को आधार बनाना गलत है। यह फैसला केवल एक पार्टी के नाम का नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे की विरासत और भविष्य के गठबंधन समीकरणों का भविष्य तय करेगा।