नवभारत विशेष: आतंकी खतरे से घिरी है इस बार की अमरनाथ यात्रा, बेस कैंप बने हाई सिक्योरिटी जोन
Amarnath Yatra 2026: 3 जुलाई से शुरू हो रही 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा पर आतंकी खतरे के मद्देनजर जम्मू से पहलगाम और बालटाल तक अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
- Written By: अंकिता पटेल
अमरनाथ यात्रा, (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Amarnath Yatra Terror Threat: आगामी 3 जुलाई से शुरू होने जा रही इस वर्ष की 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा जबर्दस्त आतंकी खतरों से घिरी है। देश के गृहमंत्री से लेकर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री तक इसके सकुशल हो जाने को लेकर चिंतित हैं। सुरक्षा व्यवस्था इतनी जबर्दस्त है कि यात्रा आरंभ होने के एक महीना पहले ही जम्मू से लेकर पहलगाम तक और बालटाल के रास्ते की पहाड़ियां तक सीआरपीएफ तथा सेना की निगरानी में आ गई हैं।
अमरनाथ यात्रा पर आतंकवादियों का खतरा इतना अधिक है कि राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों के 63 जेकेएएस अधिकारियों को प्रतिनियुक्त किया है। यह यात्रा मार्ग पर कैंप निदेशक तथा एडिशनल निदेशक के रूप में होंगे। हजारों की तादाद में अर्धसैनिक बलों के जवान लगाए गए हैं। सेना भी अपने घुड़सवार दस्तों केन साथ मौजूद रहेगी।
बताया जा रहा है कि यात्रा के लिए 670 अर्धसैनिक बलों की कंपनियों की तैनाती की गई हैं। खुफिया रिपोर्टों में कहा गया है कि यात्रा के दौरान ड्रोन से हमला हो सकता है, लिक्विड बम विस्फोट और आईईडी के माध्यम से आतंक फैलाया जा सकता है। जैश-ए-मोहम्मद की तजी पर आतंक फैलाने वाले संगठनों पर विशेष नजर रखी जा रही है। माना जा रहा है कि ये बेस कैंपों को निशाना बना सकते हैं। जम्मू कश्मीर के उन स्थानों पर विशेष नजर रखी जा रही है, जहां पर सेना का मूवमेंट है और कैमरे लगे हैं।
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पहलगाम हमले के बाद हाई अलर्ट
श्रीनगर, पहलगाम, सोनमर्ग, गुलमर्ग, दूधपत्री, यूसमर्ग, गांदरबल जैसे पर्यटन क्षेत्रों के अधिकांश पर्यटनस्थल बंद कर दिए गए हैं, जहां पर ट्रैकिंग या वैली टूरिज्म है। सिंधनटॉप, सूर्य मंदिर खेरीबल, हब्बा खातून पॉइंट भी बंद हैं। सुरक्षा के नाम पर सड़क से 50 मीटर दूर तक के पर्यटनस्थल बंद हैं।
पहलगाम में यात्रियों के यात्रा मार्ग पर सेना तथा अर्धसैनिक बलों ने लंगर वाले स्थानों के साथ ही उन्हें समर्थन करने वाले स्थानीय लोगों पर भी कड़ी नजर रखी हुई है। पहलगाम के आधार शिविर पर पूरी तरह से रेलिंग लगाकर उसे सुरक्षित किया गया है।
आखिर इस बार इतनी सुरक्षा व्यवस्था क्यों है? दरअसल, पाकिस्तान में खासकर कश्मीर के उस हिस्से में जो पाक के अनधिकृत कब्जे में है, वहां के हालत बहुत अधिक संवेदनशील हैं।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन में आतंकवादियों ने जिस तरह से 26 भारतीयों की हत्या की और उसके बाद पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से सबक दिया गया, उससे खुन्नस पाले पाकिस्तान अपने आतंकवादियों के माध्यम से अमरनाथ यात्रा को टारगेट कर सकता है। पाकिस्तान की टारगेट लिस्ट में अमरनाथ यात्रा हमेशा से रही है।
पुराने आतंकी हमलों से सबक, अमरनाथ यात्रा के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम
2000 में 2 अगस्त को आतंकवादियों ने पहलगाम बेस कैंप पर अंधाधुंध फायरिंग की थी जिसमें 32 लोगों की जान गई थी। वर्ष 2017 में 10 जुलाई को अनंतनाग जिले के पास यात्रियों की बस पर हमला हुआ, यहां पर 7 भक्तों की मौत हुई तथा एक दर्जन से अधिक घायल हुए। इसके अतिरिक्त 1993-1996 के बीच भी पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा यात्रियों को हमला करके घायल किया जा चुका है।
इन घटनाओं को देखते हुए न सिर्फ यहां के आतंकवादियों के छिपने की संभावना वाले स्थानों पर प्रतिबंध लगाया गया है बल्कि पूरा हवाई जोन नो फ्लाई जोन में बदला जा चुका है। एंटी ड्रोन सिस्टम तथा मल्टी डाइमेंशलन कैमरे तो हर क्षेत्र पर नजर रखने के लिए हैं ही। इस बार हेलीकॉप्टर सुविधा बंद है। सिर्फ आकस्मिक घटना में मदद के लिए हैलीपैड तैयार किए गए हैं।
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राजौरी में जिस तरह से आतंकवादियों को खोज पाना मुश्किल हो रहा है, वह भी एक बड़ी चुनौती है। यहां पर 3 आतंकवादियों के छिपे होने की बात है। लेकिन यहां जारी बडे। ऑपरेशन के बावजूद उनका नहीं मिल पाना खतरा बना हुआ है। अमरनाथ यात्रा के लिए राज्य में एक खास अभियान भी तेज कर दिया गया है।
आतंकी मददगारों पर शिकंजा, बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या से सुरक्षा चुनौती भी बढ़ी
उन कर्मचारियों को पकड़ा जा रहा है, जो आतंकवादियों के मददगार हो सकते हैं। गत वर्ष जब बैसरन में हमला हुआ तो स्थानीय मददगारों की भूमिका सामने आई थी। सेना तथा अर्धसैनिक बलों के लिए यहां एक परेशानी स्थानीय भाषा से आती है। वह यहां पर अधिकांशतः बोली जाने वाली भाषा कश्मीरी को नहीं समझते हैं। भक्तों की शिव के प्रति आस्था का आलम यह है कि अमरनाथ यात्रा में आने वाले भक्तों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है।
लेख-मनोज वार्ष्णेय के द्वारा
