प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Future of Artificial Intelligence: विश्व में इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या एआई का बोलबाला है, लेकिन आगे चलकर एजीआई (आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस) का जमाना आने वाला है। अभी एआई मानव की तुलना में बेहतर काम कर रही है।
चेस इंजन, राइटिंग कोड, चित्र बनाने या मेडिकल डायग्नोसिस में उसका इस्तेमाल होने लगा है। इतने पर भी तथ्य यह है कि एआई मॉडल चित्र तो बना देगा, लेकिन वह नहीं जानता कि चित्र क्या है या कौन सा कोड उसने क्रिएट किया है।
यह बातें सॉफ्टवेयर इंजीनियर जानता है। एआई सिर्फ दिया हुआ काम कर सकता है, उसके बाहर का काम नहीं जैसे कि सेल्फ ड्राइविंग सिस्टम कोड नहीं लिख सकता या चिकित्सा संबंधी कार्य नहीं कर सकता।
वह मानव द्वारा दिए गए कार्य तक सीमित रहता है। एआई की अपनी सीमाएं हैं, इसके विपरीत एजीआई मानव मस्तिष्क के समान है। उसका सिस्टम निर्णय ले सकता है कि करने लायक क्या है।
वह निर्देश के बगैर काम कर सकता है, दूरगामी लक्ष्य तय कर सकता है तथा रणनीति निधर्धारित कर सकता है एजीआई की गति व जटिलता मानव नियंत्रण से परे जा सकती है। एजीआई मानवीय मूल्यों को नहीं समझता।
इंसानों की भारी बेरोजगारी से उसे मतलब नहीं है। यदि एजीआई को शत्रों से लैस किया गया तो वह मानवता के लिए खतरा बन जाएगा। एलन मस्क का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में तकनीक विकसित होते देखी है, लेकिन एजीआई तो परमाणु शस्त्रों से भी अधिक खतरनाक है।
एजीआई के जन्मदाता कहे जाने वाले ज्याफ्री हिंटन ने चेतावनी दी थी कि अत्यंत शक्तिशाली एजीआई से निपटने के लिए यदि तैयारी नहीं की गई तो मानवता को नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने परमाणु खतरे के नियमों के समान एजीआई पर भी कठोर नियमों से अंकुश लगाने की सलाह दी।
डीपमाइंड के सीईओ डेनिस हस्सावीस ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि एजीआई को लेकर अंतरराष्ट्रीय समन्वय व नियमन नहीं किया गया, तो बेहद घातक परिणाम हो सकते हैं। एजीआई से अनुसंधान व विकास को स्वचालित बल मिलने से प्रचुर समृद्धि हासिल होगी तथा जीवनस्तर ऊंचा होगा।
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जो प्रगति कई दशकों में हो पाती थी, वह कुछ ही वर्षों में संभव होगी। एजीआई पर मानव का नियंत्रण बना रहना चाहिए अन्यथा उसका व्यवहार नई समस्याएं पैदा कर देगा। उसे स्वच्छंद होने से रोकने के लिए सुरक्षा अनुसंधान व परीक्षण किए जाने चाहिए, उसका दुरुपयोग शोषण को जन्म देगा। वह रोजगार के अवसरों को भी तेजी से खत्म कर सकता है। इसका ध्यान रखना होगा कि यह समाज की मौजूदा व्यवस्था को चुनौती न दे और मानव केंद्रित बना रहे।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा