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Beggar Removal During Events: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, रामायण में उल्लेख है कि सीता-राम के विवाह से राजा दशरथ इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने सारे भीख मांगनेवालों को एकसाथ इतना धन दे दिया कि उन्हें जीवन में भिक्षा मांगने की आवश्यकता ही न पड़े। ऐसे ही महादानी कर्ण के पास जो कुछ मांगने आता था, वह यथेष्ठ धन लेकर वापस जाता था। इसे कहते हैं भिक्षा निवारण, अब ऐसा क्यों नहीं होता?’
हमने कहा, ‘सरकार भिखारियों की समस्या अलग फार्मूले से हल कर रही है। जब राजधानी दिल्ली सहित देश के किसी शहर में अंतरराष्ट्रीय आयोजन होते हैं तो सरकारी मशीनरी भिखारियों को नजरों से ओझल कर देती है। यह पीसी सरकार के जादू जैसा होता है। सारे भिखमंगों को पकड़कर शहर से बहुत दूर कर दिया जाता है। गंदी बस्तियों व झोपड़पट्टियों पर आवरण डालकर छुपाया जाता है। दिल्ली में एशियन गेम्स व कॉमनवेल्थ गेम्स के समय यही हुआ। इसी तरह जी-20 के दिल्ली सहित विभिन्न शहरों के आयोजन के दौरान भी किया गया और अब दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन में भी ऐसा ही हो रहा है। शहर को खूबसूरत और संपन्नता से परिपूर्ण दिखाना है तो भिखारियों को हटाओ और मलिन बस्तियों को कपड़े या साउंड बैरियर वाली दीवारों से ढक दो। इस पॉलिसी का नाम है परदे में रहने दो, परदा न हटाओ, परदा जो हट गया तो भेद खुल जाएगा।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, जब फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई जैसी हस्तियां आई हों तो शहर सुंदरतम दिखना चाहिए, अपना घर साफ-सुथरा और चकाचक तो रखना ही होगा।’
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हमने कहा, ‘आयोजन समाप्त होने और विदेशी अतिथियों के प्रस्थान के उपरांत सब कुछ पहले जैसा ही हो जाएगा। सभी भिखारी अपने ठिकाने पर लौट आएंगे। मलिन बस्तियां फिर नजर आने लगेंगी, चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात ही हमारी व्यवस्था का सच है जिसे कोई नहीं बदल सकता, हम विश्व की तीसरे नंबर की इकोनॉमी बन जाएं तब भी हमारे मंदिर, मस्जिद, दरगाह, चर्च के पास भिखारियों की जमात नजर आएगी। यह एक नंगी सच्चाई या शाश्वत सत्य है। हम बीमारी को छुपा या दबा सकते हैं, उसका इलाज नहीं कर सकते।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा