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भारत की डिजिटल क्रांति: UPI और ‘India Stack’ ने बदली 65 करोड़ भारतीयों की किस्मत, जानें कैसे

Digital India: इंडिया स्टैक आधारित DPI मॉडल ने आधार, UPI और भारत कनेक्ट जैसी सेवाओं से डिजिटल भुगतान को देशभर में पहुंचाया। PhonePe जैसे प्लेटफॉर्म ने 99% पिनकोड तक डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा दिया।

  • Written By: आकाश मसने
Updated On: Feb 18, 2026 | 04:46 PM

प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)

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India Stack Digital Public Infrastructure: भारत में डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI), यानी ‘इंडिया स्टैक’ ने डिजिटल सेवाओं की पहुंच हर कोने तक आसान और सुरक्षित बना दी है। आधार, यूपीआई, भारत कनेक्ट, ई-रूपी, फास्टैग और डिजिलॉकर जैसी पहलें नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी में डिजिटल क्रांति ला रही हैं।

‘इंडिया स्टैक’ एक ओपन-सोर्स डिजिटल ढांचा है। इसका उद्देश्य देश के नागरिकों को सुरक्षित, तेज और समावेशी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराना है। आधार, यूपीआई, भारत कनेक्ट (पूर्व में बीबीपीएस), ई-रूपी, फास्टैग और डिजिलॉकर जैसी सेवाएं इसी ढांचे का हिस्सा हैं। इन पहलों ने सरकारी और निजी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से व्यापक स्तर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसी डीपीआई मॉडल पर आधारित एक प्रमुख फिनटेक प्लेटफॉर्म फोनपे ने डिजिटल भुगतान को आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया है। इसकी मुख्य पेशकश यूपीआई है, जिसने देश के 99 प्रतिशत से अधिक पिनकोड में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया है और लाखों भारतीयों के लेन-देन का तरीका बदल दिया है।

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UPI डिजिटल भुगतान की रीढ़

2016 में लॉन्च हुए इस ऐप का मुख्य फीचर यूपीआई आधारित भुगतान है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता 24×7 तुरंत किसी भी बैंक खाते में पैसे भेज या प्राप्त कर सकते हैं। एक ही ऐप में कई बैंक खातों को जोड़ने की सुविधा इसे बेहद सरल और उपयोगी बनाती है।

यूपीआई में ये सुविधाएं भी

  • यूपीआई ऑटोपे:- मोबाइल बिल, बिजली बिल, ईएमआई, ओटीटी सब्सक्रिप्शन, बीमा प्रीमियम या म्यूचुअल फंड जैसी आवर्ती भुगतानों के लिए ऑटो-डेबिट मैंडेट सेट करने की सुविधा।
  • यूपीआई लाइट:- 1,000 रुपये तक के छोटे लेन-देन के लिए पिन-फ्री और तेज भुगतान समाधान, जिससे बैंकिंग सिस्टम पर भार भी कम होता है।
  • यूपीआई सर्कल:- किसी विश्वसनीय व्यक्ति (जैसे माता-पिता या युवा सदस्य) को सीमित सीमा तक भुगतान की अनुमति देने की सुविधा, जिससे बिना बैंक खाता वाले सदस्य भी सुरक्षित लेन-देन कर सकें।
  • यूपीआई वॉलेट:- यह वॉलेट यूपीआई से पूरी तरह इंटरऑपरेबल है। उपयोगकर्ता किसी भी यूपीआई क्यूआर कोड पर वॉलेट से भुगतान कर सकते हैं या किसी भी यूपीआई आईडी पर पैसे भेज सकते हैं।
  • भारत कनेक्ट सेवाएं:- यह इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म विभिन्न बिल भुगतानों को सरल बनाता है। मोबाइल और ब्रॉडबैंड रिचार्ज, बीमा प्रीमियम, लोन व क्रेडिट कार्ड भुगतान, बिजली-पानी-गैस बिल, फास्टैग रिचार्ज, स्कूल फीस, म्युनिसिपल टैक्स और डोनेशन जैसी अनेक सेवाएँ एक ही ऐप पर उपलब्ध हैं।
  • ई-केवाईसी:- आधार आधारित ई-केवाईसी से पहचान सत्यापन तुरंत और पेपरलेस तरीके से हो जाता है। इससे
  • वित्तीय सेवाएं:- जैसे लोन, बीमा और निवेश के लिए ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया आसान और तेज हो गई है। मर्चेंट्स के लिए भी यह पहचान सत्यापन में सहायक है।
  • यूपीआई पर रूपे क्रेडिट कार्ड:- रूपे नेटवर्क को यूपीआई आईडी से जोड़कर क्रेडिट भुगतान को सरल बनाया गया है। इससे उपयोगकर्ताओं को डिजिटल क्रेडिट का लाभ मिलता है और क्यूआर कोड के माध्यम से मर्चेंट्स भी क्रेडिट इकोसिस्टम का हिस्सा बन पाते हैं।

यह भी पढ़ें:- MMRDA के बजट से बढ़ेगी मेट्रो-5 की रफ्तार, 4897 करोड़ रुपये से बदलेगी कल्याण के ट्रांसपोर्ट की तस्वीर

डीपीआई मॉडल की ताकत और विस्तार

डीपीआई की शक्ति का प्रमाण इसके व्यापक विस्तार में दिखता है। यह प्लेटफॉर्म 99.9 प्रतिशत पिनकोड तक पहुंच बना चुका है। 30 सितंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार 657.56 मिलियन से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता और 47.19 मिलियन पंजीकृत व्यापारी है। वित्त वर्ष 2025 में 90.27 बिलियन ग्राहक लेन-देन और 42.66 बिलियन मर्चेंट लेन-देन हुई।

सेंसर टॉवर के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में फोनपे भारत का सबसे अधिक डाउनलोड किया जाने वाला एंड्रॉयड फाइनेंस ऐप रहा, जिसके 156 मिलियन दैनिक सक्रिय उपयोगकर्ता दर्ज किए गए।
पब्लिक डिजिटल गुड्स और निजी नवाचार के समन्वय से “इंडिया स्टैक” मॉडल ने एक मजबूत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का उदाहरण प्रस्तुत किया है। यही मॉडल भारत को एक समावेशी, सुरक्षित और टिकाऊ डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।

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Published On: Feb 18, 2026 | 04:46 PM

Topics:  

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