
शनिवार को तेल खरीदने की क्यों है मनाही (सौ.सोशल मीडिया)
Oil Buying on Saturday Rule: हिन्दू धर्म में शनिवार का दिन शनि देव की उपासना के लिए जाना जाता हैं। हिन्दू एवं ज्योतिष मान्यता के अनुसार, इस दिन शनि देव की पूजा करने से व्यक्ति को शनि दोष और साढ़ेसाती के नकारात्मक प्रभावों से राहत मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाने की विशेष परंपरा है। लेकिन, धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनिवार को सरसों का तेल खरीदने की मनाही होती है। ऐसे में आइए जानें कि अगर आप इस दिन गलती से तेल खरीद लें तो क्या करना चाहिए?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शनि का संबंध तिल और सरसों के तेल से माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि शनिवार को तेल खरीदने से शनि के नकारात्मक प्रभाव बढ़ते हैं और व्यक्ति के जीवन में संघर्ष अधिक होने लगते है। इसी कारण इस दिन तेल खरीदने के बजाय दान करने की परंपरा अधिक प्रचलित है।
ऐसा माना जाता है कि तिल या सरसों का तेल दान करने से शनि शांत होता है और बाधाएं दूर होती है। अगर शनि दोष और साढ़ेसाती के नकारात्मक प्रभावों से जूझ रहे है तो इस दिन तिल और सरसों के तेल खरीदने से बचें।
ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ का मानना है कि, शनिवार को इन दोनों तेलों को सीधे तौर पर शनि ग्रह से जुड़ा माना गया है। कुछ परंपराओं में यह भी कहा गया है कि जो भी तेल शनि पूजा में उपयोग होता है, उसे शनिवार को नहीं खरीदना चाहिए।
अक्सर ऐसा हो जाता है कि लोग भूलवश शनिवार को तेल खरीद लेते हैं और फिर अशुभ फल का डर सताने लगता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार घबराने की नहीं, बल्कि सरल उपाय करने की आवश्यकता होती है।
अगर आप भूलवश शनिवार को तेल खरीद लेते हैं खरीदे हुए तेल में से थोड़ा सा तेल शाम के समय शनिदेव को अर्पित करना चाहिए।
शनिवार को खरीदे गए बचे हुए तेल में से कुछ हिस्सा किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए।
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शनिवार शाम को सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं और शनिदेव की पूजा करनी चाहिए।
मंत्र जाप शनिवार को शनिदेव के मंत्र ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ का जाप करना चाहिए।
ये सभी उपाय करने के बाद बचा हुआ तेल आप सामान्य उपयोग के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।






