श्रीहरि विष्णु ने क्यों लिया था मत्स्य अवतार, जानिए क्या है पौराणिक कथा

भगवान विष्णु के सभी अवतारों के पीछे कुछ ना कुछ उद्देश्य अवश्य छिपा हुआ है और उनसे जुड़ी अद्भुत कथाएं भी ऋषि एवं मुनियों द्वारा वेद-ग्रंथों में वर्णन कई वर्षों पहले किया गया था, जिसका श्रवण और पाठन आज भी किया जाता है।
श्रीहरि विष्णु ने क्यों लिया था मत्स्य अवतार, जानिए क्या है पौराणिक कथा
भगवान विष्णु के प्रथम अवतार से जुड़ी कथा (सौ.सोशल मीडिया)
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Matsya Avatar Story: मत्स्य द्वादशी का पर्व इस बार 12 दिसंबर को रखा जाएगा। भगवान श्री हरि विष्णु को जगत का पालनहार और संचालनकर्ता कहा जाता है। भगवान विष्णु ने कई अवतार लिए हैं। उनमें से ही एक मत्स्य अवतार।

दरअसल, शास्त्रों में भगवान श्री हरि विष्णु के हर अवतार के पीछे कोई न कोई उद्देश बताया गया है। ज्योतिषयों के अनुसार, मत्स्य अवतार के पीछे भी एक उद्देश्य था और वो था सृष्टि का उद्धार। ऐसे में आज हम आपको श्री हरि के मत्स्य अवतार के बारे में जानेंगे, साथ ही जानेंगे कि कैसे ये अवतार लेकर ने भगवान श्री हरि विष्णु सृष्टि का उद्धार किया था।

जानिए क्या है पौराणिक कथा

कथा के अनुसार, एक बार एक सत्यव्रत नाम के प्रतापी राजा, नदी में स्नान करने गए। जब सूर्य देव को जल अर्पित कर रहे थे तो उनकी अंजलि में एक छोटी-सी मछली की आ गई। राजा ने मछली को पुनः नदी में छोड़ना चाहा, लेकिन तभी मछली बोली कि 'राजन में इस नदी में बड़े-बड़े जीव रहते हैं, जो मुझे मारकर खा सकते हैं। कृपया मेरे प्राणों की रक्षा करें।' तब राजा सत्यव्रत उस मछली को अपने कमंडल में रख लिया और अपने घर ले आए।

तालाब भी पड़ गया छोटा

अगली सुबह जब सत्यव्रत ने देखा तो पाया कि मछली का शरीर इतना बड़ा हो चुका था कि कमंडल उसके लिए छोटा पड़ गया। तब मछली बोली कि 'राजा मैं इस कमंडल में नहीं रह पा रही हूं। कृपया मेरे लिए कोई और स्थान ढूंढिए।' तब सत्यव्रत ने मछली को कमंडल से निकालकर पानी के बड़े मटके में रख दिया।

जब राजा ने अगली सुबह देखा तो मटका भी मछली के लिए छोटा पड़ गया। ऐसा करते-करते एक समय के बाद मछली का आकार इतना बड़ा हो गया कि उसे बड़े तालाब में डालना पड़ा। लेकिन कुछ समय बाद मछली का आकार इतना बढ़ गया कि तालाब भी उसके लिए छोटा पड़ गया और उसके बाद राजा ने उसे समुद्र में डाल दिया गया।

राजा को भगवान ने दिए दर्शन

लेकिन, इसके बाद समुद्र की मछली के लिए छोटा पड़ गया। तब सत्यव्रत समझ गए कि ये कोई आम मछली नहीं है। तब राजा ने बड़े ही विनम्र स्वर में पूछा, "आप कौन हैं, जिन्होंने सागर को भी डुबो दिया है ?" तब भगवान विष्णु ने उत्तर दिया कि "मैं हयग्रीव नामक दैत्य के वध के लिए आया हूं।"

जिसने छल से ब्रह्मा जी से वेदों को चुरा लिया है जिस कारण ज्ञान लुप्त होने से समस्त लोक में अज्ञानता का अंधकार फैल गया है। भगवान विष्णु आगे कहा, "आज से 7 दिन के बाद पृथ्वी पर प्रलय आएगी और संपूर्ण पृथ्वी जलमग्न हो जाएगी। तब आपके पास एक नाव आएगी और तब आपको अनाज, औषधि, बीज एवं सप्त ऋषियों को साथ लेकर उस नाव में सवार होना होगा।"

ब्रह्मा जी को वापस सौंपे वेद

भगवान के कथन अनुसार सातवें दिन प्रलय आने पर सत्यव्रत ने ऐसा ही किया और नाव में सप्त ऋषियों को नाव चढ़ाने के साथ-साथ अनाज, औषधि को भरकर रख लिया। इसी बीच सत्यव्रत को मत्स्य रूप में भगवान के पुनः दर्शन हुए। इसके बाद भगवान ने हयग्रीव राक्षस का वध किया और सभी वेद वापस लेकर ब्रह्मा जी को सौंप दिए।

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