इस बार रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर कैसी बांधे राखी, जो रहेगा भाई के लिए शुभ

Raksha Bandhan: रक्षाबंधन भाई-बहन का पर्व है। इस दिन, बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, जो उनकी रक्षा के लिए एक पवित्र धागा होता है। बदले में, भाई अपनी बहनों की रक्षा करने का वचन देते हैं।
इस बार रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर कैसी बांधे राखी, जो रहेगा भाई के लिए शुभ
कौन-सी राखी बांधना शुभ (सौ.सोशल मीडिया)
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Raksha Bandhan 2025 : रक्षाबंधन हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के बंधन का प्रतीक है। इस दिन, बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, जो उनकी रक्षा के लिए एक पवित्र धागा होता है। बदले में, भाई अपनी बहनों की रक्षा करने का वचन देते हैं।

यह त्योहार पारिवारिक समारोहों, दावतों और उपहारों के आदान-प्रदान का भी प्रतीक माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं आखिर कौन-सी राखी बांधना रक्षाबंधन पर शुभ होता है सोने की राखी, चांदी की राखी या रेशम की राखी।

आखिर कौन-सी राखी बांधना रक्षाबंधन पर शुभ :

  • रेशम के धागे या सूत

ज्योतिषयों के अनुसार, रक्षाबंधन का सूत यानी धागा आमतौर पर रेशम के धागे या सूत से बना होता है, जिसे बहुत शुभ माना जाता है। अधिकतर राखियां रेशम के धागे या सूत से बनी होती हैं जिसके बांधना शुभ होता है। यह पवित्रता का प्रतीक है।

  • चांदी की राखी

वास्तु शास्त्र के अनुसार, चांदी की राखी भाई को बांधना बेहद शुभ माना जाता है। इस राखी को बांधने से अगर भाई की कुंडली में चंद्र दोष है तो इससे मुक्ति पाई जा सकती है। चांदी की राखी से मानसिक शांति का अनुभव होता है। इसीलिए चांदी की राखी भी भाई को बांधना शुभ बताया गया है।

  • सोने की राखी

कहा जाता है कि, अगर कोई बहन अपने भाई को सोने की बांधती हैं तो इसे भी शुभ माना गया है। सोना धन, समृद्धि और प्रेम का प्रतीक है। सोने की राखी भाई के प्रति स्नेह को दर्शाता है।

हर कोई अपने सामर्थ एवं शक्ति के अनुसार ही भाई को राखी बांधता है, फिर चाहे राखी सूत की हो, या चांदी की या सोने की सच्चे मन और भाई के प्रति प्रेम और स्नेह को देखकर बांधी गई हर राखी भाई के लिए शुभ होती है।

वेद-पुराणों के अनुसार, राखी बांधते समय केवल भौतिक सुंदरता नहीं, बल्कि उसमें छुपे भाव और ऊर्जा का ध्यान रखना चाहिए। यह तय करता है कि राखी कितनी शुभ मानी जाएगी।

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क्या है रक्षाबंधन की असली कहानी

राजा बलि ने जब माता लक्ष्मी से रोने का कारण पूछा तो मां ने कहा कि उनका कोई भाई नहीं है इसलिए वो रो रही हैं। राजा ने मां की बात सुनकर कहा कि आज से मैं आपका भाई हूं। माता लक्ष्मी ने तब राजा बलि को राखी बांधी और उनके भगवान विष्णु को मांग लिया है। ऐसा माना जाता है कि तभी से भाई- बहन का यह पावन पर्व मनाया जाता है।

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