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आ गई वट सावित्री व्रत की सही तिथि, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा के नियम और सनातन धर्म में इसका महत्व

भगवान विष्णु को समर्पित ज्येष्ठ मास में वट सावित्री व्रत महिलाओं के लिए खास माना जाता है। यह व्रत खास तौर पर पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूती देने के लिए मनाया जाता है।

  • By सीमा कुमारी
Updated On: May 17, 2025 | 03:42 PM

वट सावित्री पूजा का नियम (सौ.सोशल मीडिया)

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26 मई को वट सावित्री व्रत पूरे देश भर में रखा जाएगा। हिंदू धर्म में इस व्रत का बड़ा महत्व होता है। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए एक खास पर्व है। यह व्रत पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है।

इस दिन महिलाएं वट के वृक्ष की पूजा करती हैं और सावित्री की कथा सुनती हैं, जिन्होंने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से भी छीन लिए थे। इस साल वट सावित्री व्रत की डेट को लेकर कुछ कन्फूयजन बनी हुई है, तो आइए इसकी सही डेट जानते हैं, जो इस प्रकार है।

वट सावित्री व्रत 2025 26 या 27 मई कब है

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि 26 मई को दोपहर 12 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 26 मई को सुबह 08 बजकर 31 मिनट पर होगा। सनातन धर्म में उदया तिथि का महत्व है। ऐसे में वट सावित्री व्रत 26 मई को रखा जाएगा।

यह भी पढ़ें-पहली बार ‘वट सावित्री व्रत’ कर रही महिलाएं जान लें पूजा के ये नियम, फलित होगी मनोकामनाएं

  • जानिए वट सावित्री पूजा का नियम
  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें स्नान करें और पूजा घर की सफाई करिए।
  • फिर आप वट वृक्ष की फोटो अथवा नवीन कोपलों वाली वट वृक्ष की टहनी लेकर पूजा चौकी पर रखें।
  • आपको बता दें कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी तीनों का वास माना गया है।
  • पूर्व या उत्तर मुख होकर पूजा करें।
  • वट वृक्ष के नीचे 11 देशी घी के दीपक जलाएं या अपनी पूजा चौकी के पास भी जला सकते हैं।
  • व्रत नहीं कर सकती हैं, तो परिवार की अन्य महिलाओं के साथ स्नान आदि करके पूजा में शामिल हों।
  • इस पूजा में आप वट सावित्री की कथा सुनें।
  • यह व्रत एक दिन पहले शाम में फल अथवा कुट्टू से बने पकवान खाकर रखें।
  • गर्भवती महिलाएं परिवार की बुजुर्ग महिलाओं की देख-रेख में यह व्रत करें।

सनातन धर्म वट पूजा का महत्व

सनातन धर्म वट वृक्ष यानी बरगद का पेड़ अमरता का प्रतीक माना जाता है। यह एक बहुत पुराना और विशाल वृक्ष होता है, जो दशकों तक जीवित रहता है। इसे व्रत के दौरान पूजा जाता है क्योंकि यह पति की लंबी उम्र और जीवन में स्थिरता की कामना का प्रतीक है।

वट सावित्री व्रत में महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती है। इसके साथ परिक्रमा करने के बाद सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती है। कहते हैं कि, बरगद के वृक्ष में तीनों देवताओं यानि ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है इसलिए पूजा में वट वृक्ष को शामिल किया गया है।

इसे लेकर पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिस तरह सावित्री अपने समर्पण से अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस लाई थीं, उसी तरह इस शुभ व्रत को रखने वाली विवाहित महिलाओं को एक सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 

When vat savitri vrat rules and worship method

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Published On: May 17, 2025 | 03:42 PM

Topics:  

  • Lifestyle News
  • Religion
  • Shani Jayanti
  • Vat Savitri

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