संकटों से मुक्ति का अनुपम अवसर, फरवरी में इस दिन दुर्गाष्टमी, शिववास योग के साथ शुक्ल और ब्रह्म योग का विशेष संयोग, जानिए सबकुछ

सनातन धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी का दिन बहुत ही पावन और शुभ माना गया हैं। इस बार फरवरी महीने की मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत 05 फरवरी को मनाई जाएगी।
संकटों से मुक्ति का अनुपम अवसर, फरवरी में इस दिन दुर्गाष्टमी, शिववास योग के साथ शुक्ल और ब्रह्म योग का विशेष संयोग, जानिए सबकुछ
मासिक दुर्गाष्टमी (सौ.सोशल मीडिया)
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February Durga Ashtami 2025: सनातन धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी का दिन बहुत ही पावन और शुभ माना गया हैं। हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि जगत की देवी मां दुर्गा को समर्पित होता है। इस दिन जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त अष्टमी का व्रत भी रखा जाता है। इस बार फरवरी महीने की मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत 05 फरवरी को मनाई जाएगी।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजन करने वालों पर माता दुर्गा की विशेष कृपा होती है। माता की कृपा से उनके घर में अन्न और धन का भंडार भरा रहता है। कभी धन संबंधी परेशानी नहीं आती। रुके काम पूरे होते हैं। घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।

हालांकि लोगों में इस महीने मासिक दुर्गाष्टमी के व्रत को लेकर संशय की स्थिति है। फरवरी में मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत 5 तारीख को रखा जाएगा या 6 को आइए जानते हैं मासिक दुर्गाष्टमी के व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियम-

कब है मासिक दुर्गाष्टमी

पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 05 फरवरी को भारतीय समयानुसार देर रात 02 बजकर 30 मिनट पर होगी। वहीं, अष्टमी तिथि की समाप्ति 06 फरवरी को देर रात 12 बजकर 35 मिनट पर होगी। जगत की देवी मां दुर्गा की पूजा निशा काल में होती है। अत: 05 फरवरी को माघ महीने की दुर्गा अष्टमी मनाई जाएगी।

मासिक दुर्गा अष्टमी शुभ योग

ज्योतिषियों की मानें तो माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर शुक्ल और ब्रह्म योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही भद्रावास योग का भी संयोग है। इस दिन भद्रा दोपहर तक स्वर्ग में रहेंगी। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा करने से साधक को जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होगी। साथ ही सभी बिगड़े काम बन जाएंगे। साधक सुविधा अनुसार समय पर मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं।

पूजा विधि

मासिक दुर्गाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए।

फिर पूजा स्थल को साफ करके मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए। साथ उसे लाल रंग के वस्त्र से ढक देना चाहिए।

पूजा के दौरान मां दुर्गा को गंगाजल से स्नान कराना चाहिए। फिर उन्हें फूल, चंदन, रोली, सिंदूर आदि चढ़ाना चाहिए।

मां दुर्गा को फल और मिठाई का भोग लगाना चाहिए। अन्य चीजों का भी भोग लगाया जा सकता है।

मां दुर्गा के विभिन्न मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए।

मां दुर्गा की स्तुति करनी चाहिए. उनकी कथा भी जरूर पढ़नी या सुननी चाहिए।

अंत में मां दुर्गा की आरती करनी चाहिए।

इस दिन कन्याओं को भोजन कराना चाहिए. उन्हें दान भी देना चाहिए।

क्या है मासिक दुर्गाष्टमी के नियम

मासिक दुर्गाष्टमी के दिन व्रत रखना और सात्विक भोजन ही करना चाहिए।

गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना चाहिए।

इस दिन मांसाहार और शराब के सेवन से बचना चाहिए।

लाल रंग कपड़े नहीं पहनने चाहिए। झूठ नहीं बोलना चाहिए।

किसी के बारे में भी बुरा बोलना या सोचना नहीं चाहिए।

बड़ों का अनादर नहीं करना चाहिए।

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