आज है दिसंबर का पहला प्रदोष, भगवान शिव की विशेष कृपा के लिए इस विशेष मुहूर्त में करें पूजा
Lord Shiva:आज दिसंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से शिवजी की कृपा होती है और भक्तों को सभी दुख-दर्द से मुक्ति मिलती है।
- Written By: सीमा कुमारी
जानिए प्रदोष व्रत का पूजा का सही मुहूर्त (सौ.सोशल मीडिया)
December Pradosh Vrat 2025 Date: आज 2 दिसंबर 2025, मंगलवार को दिसंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। यह पावन तिथि देवों के देव महादेव और माता पार्वती की पूजा- अर्चना के लिए समर्पित है। अगर हिंदू धर्म मान्यता की बात करें तो, जो भक्त इस दिन प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं, उनके सभी कार्य सफल होते हैं।
इसके अलावा इस व्रत से पाप, रोग और दोष मिटते हैं साथ ही, शिव जी की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस वर्ष, पंचांग के अनुसार, यह शुभ तिथि आज 02 दिसंबर मंगलवार को दोपहर 03 बजे शुरू होकर 57 मिनट से होगी और इस तिथि का समापन अगले दिन 03 दिसंबर 2025, बुधवार को दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर होगा। जानिए दिसंबर में भौम प्रदोष व्रत कब है और पूजा का सही मुहूर्त क्या है।
जानिए प्रदोष व्रत का पूजा का सही मुहूर्त
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, अगहन महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत आज 02 दिसंबर को दोपहर 03 बजे शुरू होकर 57 मिनट पर रहेंगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार यह व्रत 2 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा।
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वहीं, इसका समापन 03 दिसंबर को दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा होती है।
कैसे करें भौम प्रदोष व्रत की पूजा
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत रखने का संकल्प लें।
- पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल छिड़कें।
- भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
- प्रदोष काल से पहले एक बार फिर स्नान करें।
- इसके बाद प्रदोष काल में भगवान शिव का अभिषेक जल या पंचामृत से विधिवत करें।
- महादेव को बिल्व पत्र, भांग, धतूरा, अक्षत, धूप, दीप और भोग अर्पित करें।
- भोग में खीर या ठंडई चढ़ाना भी शुभ माना जाता है।
- ध्यान रहे कि शिवजी को केतकी और केवड़ा के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए।
- शिव जी के वैदिक मंत्रों ‘ॐ नमः शिवाय, महामृत्युंजय’ का कम से कम 108 बार जाप करें।
- प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें और अंत में शिव-पार्वती की आरती करें।
- इस दिन तामसिक चीजों से पूरी तरह से दूर रहें।
जानिए क्या है भौम प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व
सनातन धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि, जब यह व्रत मंगलवार को पड़ता है, तो इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। ‘भौम’ शब्द मंगल ग्रह से जुड़ा है।
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कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से शिवजी की कृपा मिलती है और भक्तों को सभी दुख-दर्द से मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व होता है, जो शत्रुओं पर विजय और बाधाओं को दूर करने में मदद करते हैं।
