Skanda Shashti Vrat: बुधवार को है स्कंद षष्ठी का व्रत, यहां जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Skanda Shashti Puja Vidhi : बुधवार को स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाएगा, जो भगवान कार्तिकेय की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भक्त विधि-विधान से पूजा कर मनोकामनाओं की पूर्ति है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान कार्तिकेय( सौ.सोशल मीडिया)
Skanda Shashti Vrat Kab Hai : भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े बेटे भगवान कार्तिकेय को समर्पित स्कंद षष्ठी का व्रत हर महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। इस बार वैशाख महीने का स्कंद षष्ठी का व्रत 22 अप्रैल को रखा जाएगा।
Skanda Shashti Vrat स्कंद षष्ठी का व्रत महत्व
सनातन धर्म में स्कंद षष्ठी का व्रत बड़ा महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंद षष्ठी का व्रत उन दंपत्तियों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है जो संतान प्राप्ति की कामना रखते है। इसके अलावा, यह व्रत शत्रुओं पर विजय, आत्मविश्वास में वृद्धि और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए भी रखा जाता है।
कब रखा जाएगा स्कंद षष्ठी व्रत?
स्कंद षष्ठी का व्रत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल षष्ठी तिथि की शुरुआत 21 अप्रैल को रात 1 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी। जबकि, इस तिथि की समाप्ति 22 अप्रैल को रात 10 बजकर 49 मिनट पर होगी. इसलिए, उदया तिथि की मान्यता के अनुसार, 22 अप्रैल को ही स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाएगा।
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पूजा की एकदम आसान विधि
- इस व्रत की पूजा बहुत ही सरल है। बस इन आसान बातों का ध्यान रखें:
- व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर नहा लें और साफ सुथरे कपड़े पहन लें।
- घर के मंदिर या पूजा वाली जगह की अच्छे से सफाई करें।
- एक लकड़ी की चौकी पर भगवान कार्तिकेय और पूरे शिव परिवार (शिव जी, माता पार्वती और गणेश जी) की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- सच्चे मन से उन्हें फूल, फल और धूप-दीप (अगरबत्ती और दीया) अर्पित करें।
- पूजा के दौरान भगवान कार्तिकेय के मंत्रों का जाप करें और ‘स्कंद षष्ठी व्रत कथा’ जरूर पढ़ें या सुनें।
- आखिर में भगवान को भोग लगाकर आरती करें और पूरे परिवार को प्रसाद बांटें।
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क्यों इतना खास है यह व्रत?
धार्मिक ग्रंथों और पुराणों की मानें तो स्कंद षष्ठी को जीत और शक्ति का दिन माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि जो भी इंसान सच्चे मन से यह व्रत करता है, उसके जीवन में अपार सुख-शांति आती है। यह व्रत मुख्य रूप से ‘संतान सुख’ के लिए किया जाता है। माना जाता है कि इससे बच्चों के जीवन में तरक्की होती है और वे हर तरह की बीमारियों से बचे रहते हैं।
