आज है द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी, शाम को घर की इन दिशाओं में जलाएं दीया, विघ्नहर्ता श्रीगणेश की बरसेगी कृपा!

Sankashti Chaturthi February 2026:आज द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का शुभ योग है। इस पावन तिथि पर शाम के समय घर की कुछ विशेष दिशाओं में दीपक जलाने से विघ्नहर्ता श्रीगणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Sankashti Chaturthi 2026 Puja Vidhi
भगवान गणेश (सौ.सोशल मीडिया)
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Sankashti Chaturthi 2026 Puja Vidhi: प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी का व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस बार फाल्गुन महीने की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत आज मनाई जा रही है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

बताया जा रहा है कि, इस बार गुरुवार का दिन होने के कारण यह व्रत और भी फलदायी हो गया है, क्योंकि गुरुवार भगवान विष्णु का दिन है और गणेश जी उनके प्रिय हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शाम के समय घर के कुछ खास स्थानों पर दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से गणपति बप्पा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की शाम घर के किस स्थानों में जलाएं दीपक

  • घर के मुख्य द्वार

ज्योतिषियों के अनुसार, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की शाम घर के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर दीपक जलाएं। कहते है ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

  • घर के मंदिर

इस दिन घर के मुख्य द्वार के अलावा घर के मंदिर यानी बप्पा के सामने घी का दीपक जलाएं और उसमें एक लौंग डाल दें। इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है और घर में सुख समृद्धि आती है।

  • रसोई घर

संकष्टी चतुर्थी की शाम घर के रसोई में भी दीपक जलाना शुभ होता है खासतौर पर पीने के पानी के पास दीपक जरुर जलाए। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा दृष्टि अपने परिवार जनों में बनाए रखते है।

  • तुलसी का पौधा

संकष्टी चतुर्थी की शाम तुलसी के क्यारे में दीपक जरूर लगाएं। इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

  • पीपल या शमी का पेड़

यदि घर के पास पीपल या शमी का पेड़ हो, तो वहां दीपक जरूर लगाएं। इससे ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते और जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का महत्व

सनातन धर्म में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत का बहुत अधिक महत्व है। विघ्नहर्ता भगवान गणेश के 32 स्वरूपों में से छठा रूप द्विजप्रिय गणेश का है। ऐसी मान्यता है कि, इस दिन व्रत रखने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि रुके हुए काम भी पूरे होते है।

शास्त्रों में बताया गया है कि, संकष्टी चतुर्थी पर दीपक जलाकर भगवान गणेश की पूजा करने से घर की आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में खुशहाली आती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है, जो जीवन में बार-बार आने वाली समस्याओं से परेशान रहते हैं।

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