
ये है रुद्राक्ष पहनने के बाद के नियम (सौ.सोशल मीडिया)
Rudraksha wearing rules: सनातन धर्म में रुद्राक्ष का बहुत अधिक महत्व है। क्योंकि इसकी उत्पत्ति देवों के देव भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। इसलिए इसे बहुत शुभ माना गया है। अगर रुद्राक्ष की करें तो, धरती पर रुद्राक्ष और शिवलिंग, स्वयंभू शिव के प्रतीक के तौर पर पूजे जाते हैं।
इस पूरी सृष्टि में इन दो से ज्यादा पवित्र और शुभ कुछ और नहीं हैं। हिन्दू शास्त्रों में बताया गया है कि, रुदाक्ष पहनने से त्रिदेवों यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश की कृपा बनी रहती है।
हिन्दू शास्त्रों में रुदाक्ष पहनने के कई नियम ज्योतिष शास्त्र में बताए गए हैं, जिन्हें नजरअंदाज करने पर इसका फल नहीं मिलता है। ऐसे में आइए जानते है रुद्राक्ष धारण करते समय किन बातो को ध्यान रखना चाहिए?
अगर धार्मिक मान्यताओं की मानें तो, रुद्राक्ष पहनने से मन शांत रहता है, तनाव कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। साथ ही,ये भी कहा जाता है कि रुद्राक्ष पहनने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, शरीर ऊर्जावान बना रहता है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा, रुद्राक्ष पहनने से हृदय संबंधी समस्याएं, शुगर और बीपी जैसी बीमारियों से भी राहत मिल सकती है।
हिन्दू मान्यता के अनुसार, रात को सोने से पहले रुद्राक्ष उतार देना चाहिए, क्योंकि सोते समय शरीर को अशुद्ध माना जाता है।
कहा जाता है कि, बाथरूम या टॉयलेट में जाते समय भी रुद्राक्ष पहनकर नहीं जाना चाहिए बल्कि बाहर ही उतार दें।
महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए।
रुद्राक्ष पहनकर मांस-मदिरा का सेवन न करें और ऐसी जगहों पर भी न जाएं जहां इन चीजों का सेवन होता हो।
किसी बच्चे के जन्म पर सूतक लगता है, ऐसे में उस घर में रुद्राक्ष पहनकर न जाएं।
रुद्राक्ष को गंदे हाथों से न छुएं और स्नान करने के बाद ही इसे दोबारा धारण करें।
अपना रुद्राक्ष किसी और को न दें और न ही किसी और का रुद्राक्ष पहनना चाहिए।
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किसी की मृत्यु होने पर शोक सभा में जाने से पहले रुद्राक्ष उतार कर घर पर रख देना चाहिए।






