ओवरथिंकिंग छोड़ो, नाम जपो और जीवन संवारो, श्री प्रेमानंद जी महाराज का सीधा संदेश

Solution to Overthinking: इंसान छोटी-छोटी बातों में उलझकर रातों की नींद खो देता है। चिंता, डर और भविष्य की फिक्र ने मन को जकड़ लिया है। ऐसे समय में Shri Premanand Ji Maharaj बातों का ध्यान रखना चाहिए।
Stop overthinking, chant the name and improve your life, a direct message from Shri Premanand Ji Maharaj
Shri Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)
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Glory of Chanting the Name: आज का इंसान छोटी-छोटी बातों में उलझकर रातों की नींद खो देता है। चिंता, डर और भविष्य की फिक्र ने मन को जकड़ लिया है। ऐसे समय में Shri Premanand Ji Maharaj का यह संदेश जीवन को नई दिशा देता है "व्यर्थ का सोचना बंद करो और आगे बढ़ो!"

मानव जीवन का असली उद्देश्य क्या है?

महाराज जी समझाते हैं कि यह मानव देह केवल चिंता और भ्रम में समय गंवाने के लिए नहीं मिली। इसका लक्ष्य उस परम आनंद की प्राप्ति है, जिसे पा लेने के बाद कुछ भी शेष नहीं रहता। जब तक शरीर स्वस्थ है और इंद्रियां साथ दे रही हैं, तब तक साधना, सत्कर्म और भगवद-चिंतन में लग जाना चाहिए। वे कहते हैं, समझदार वही है जो संकट आने से पहले तैयारी कर ले। बीमारी आने के बाद मन को भगवान में लगाना कठिन हो जाता है। यदि तन स्वस्थ है, तो आसन पर बैठकर मंत्र-जप, भजन और श्री राधा नाम का स्मरण करें। शरीर की सुंदरता और बनावट पर घमंड करना व्यर्थ है यह मोह ही मन को मैला करता है।

ओवरथिंकिंग क्यों बनती है दुख का कारण?

आज की भाषा में जिसे ‘ओवरथिंकिंग’ कहते हैं, वह दरअसल विकारों की गुलामी है। काम, क्रोध और लोभ जैसे दोष मनुष्य को भीतर से कमजोर कर देते हैं। जहां विनम्रता दिखानी चाहिए गुरु और संतों के सामने वहां हम अहंकार दिखाते हैं। और जहां दृढ़ता चाहिए विकारों के सामने वहां घुटने टेक देते हैं। महाराज जी प्रेरित करते हैं कि यदि अहंकार करना ही है, तो इस बात का करो कि "मैं प्रिया जी का हूँ।" हरि नाम और "राधा-राधा" का जप ही मन के दोषों को शांत कर सकता है।

गुरु-कृपा और सत्संग की शक्ति

वे कहते हैं कि बिना रसिक संतों के संग के, प्रभु प्रेम की अनुभूति कठिन है। यदि कोई महापुरुष डांटकर भी मार्ग दिखाएं, तो उसे कृपा मानना चाहिए। "ध्यान मूलम गुरु मूर्ति" गुरु का स्मरण ही जीवन के विघ्नों को दूर कर देता है। स्नान करते समय या घर से निकलते समय गुरु चरणों का ध्यान करना मन को स्थिर बनाता है।

वृंदावन की रज और अंत समय की तैयारी

विकारों से मुक्ति के लिए वे श्री वृंदावन की रज का महत्व बताते हैं। संतों की चरण-रज में अद्भुत शक्ति है, जो आत्मबोध तक पहुंचा सकती है। महाराज जी कहते हैं कि लोग जीवन भर रहने की तैयारी करते हैं, पर जाने की तैयारी नहीं करते। मृत्यु डर नहीं, बल्कि महोत्सव है यदि मन नाम-धन से भरा हो। अंत में वे प्रेरित करते हैं किसी से बैर मत रखो, किसी को दुख मत दो। अभी से नाम जप शुरू करो और सतमार्ग पर चल पड़ो।

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