प्रथम पूजनीय भगवान गणेश (सौ.सोशल मीडिया)
Dwijapriya Chaturthi Remedies: फाल्गुन महीने में पड़ने वाली द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत इस बार 5 फरवरी 2026 को है। सनातन धर्म में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का खास महत्व है। हिंदू धर्म में प्रथम पूजनीय भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और विघ्नहर्ता अर्थात् बाधाओं को दूर करने वाला देवता बताया गया है।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन घरों और मंदिरों में धूमधाम से भगवान गणेश की पूजा की जाती है। यह शुभ एवं पावन तिथि विद्यार्थियों के लिए बेहद खास माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से एकाग्रता बढ़ती है, बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है और शिक्षा व कार्यक्षेत्र में उन्नति मिलती है।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को 21 दूर्वा यानी घास की गांठें अर्पित करें। सनातन धर्म में दूर्वा को ‘अमृत’ के समान माना गया है। ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश को दूर्वा को चढ़ाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
शिक्षा में सफलता के लिए इस दिन अपनी किताबें या पेन भगवान गणेश के चरणों में रखें। इसके बाद “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
इस दिन गरीब बच्चों को शिक्षा से जुड़ी सामग्री जैसे पेन, पेंसिल या नोटबुक का दान करना शुभ माना जाता है। कहते है इससे बुध ग्रह मजबूत होता है, ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है तथा तर्कशक्ति बढ़ती है।
द्विजप्रिय चतुर्थी के दिन पूजा करते समय सफेद या पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इससे मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है।
इस दिन पूजा के समय भगवान गणेश के निम्न मंत्रों का जाप करें-
ॐ नमो हेरम्ब मद मोहितं मम संकटान् निवारय-निवारय स्वाहा.
“विद्यार्थी लभते विद्यां, धनार्थी लभते धनम्.
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्, मोक्षार्थी लभते गतिम्॥”
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‘द्विजप्रिय’ का अर्थ है- जो ब्राह्मणों या विद्वानों के प्रिय हों। इस दिन भगवान गणेश के 32 स्वरूपों में से छठे स्वरूप की पूजा की जाती है। इस स्वरूप के चार हाथ होते हैं और यह ज्ञान का प्रतीक माने जाते हैं।
मान्यता है कि इस स्वरूप की उपासना से ज्ञान की प्राप्ति होती है, बुद्धि का विकास होता है और जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं।