माघ पूर्णिमा (सौ.सोशल मीडिया)
Magh Purnima Vrat Katha in Hindi: सनातन धर्म में माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस साल माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 रविवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी की सुबह लगभग 5:52 बजे शुरू होकर 2 फरवरी की सुबह 3:38 बजे तक रहेगी, लेकिन उदया तिथि के आधार पर माघ पूर्णिमा 1 फरवरी को ही मनाया जाएगा।
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
लोक मान्यता है कि, माघ पूर्णिमा की पूजा के दौरान कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। ऐसा न करने से व्यक्ति शुभ फल की प्राप्ति से वंचित रहता है। यहां पढ़िए माघ पूर्णिमा की कथा।
पौराणिक कथा के अनुसार, माघ पूर्णिमा को लेकर शास्त्रों में कुछ कथाएं वर्णित हैं। इनमें से एक हैं शुभव्रत ब्राह्मण की कथा। माघी पूर्णिमा की इस कथा के अनुसार, नर्मदा नदी के किनारे एक विद्वान ब्राह्मण निवास करता था, जिसका नाम शुभव्रत था।
कथा में वर्णित है कि शुभव्रत इतना विद्वान होने के बावजूद बहुत ही लालची स्वभाव का व्यक्ति था। वह बस किसी न किसी तरह धन कमाने में यकीन रखता था, चाहे तरीका कोई भी हो। इसी कारण शुभव्रत समय से पूर्व ही वृद्ध दिखने लगा और कई तरह की बीमारियों ने भी उसे घेर लिया था।
हालांकि, उसे समय रहते सद्बुद्धि आई और उसने सोचा कि पूरा जीवन तो धन कमाने में बीत गया, लेकिन अब जीवन का उद्धार कैसे हो सकेगा।
यही सब विचार करते करते उसे माघ के महीने में पवित्र नदी के तट पर स्नान का महत्व बताने वाला एक श्लोक याद आया। इसके बाद स्नान का संकल्प लेकर ब्राह्मण शुभव्रत नर्मदा नदी में स्नान करने लगा।
उसने करीब 9 दिनों तक नदी पर जाकर स्नान किया। इसके बाद शुभव्रत की तबियत और ज्यादा बिगड़ गई और उसकी मृत्यु का समय भी नजदीक आ गया।
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शुभव्रत सोच रहा था कि आज तक जीवन में उसने कोई अच्छा कार्य नहीं किया, तो अब मृत्यु के बाद नरक में ही जाना पड़ेगा, लेकिन इसके वितरित उसे मोक्ष मिला। क्योंकि शुभव्रत ने माघ मास में पवित्र नदी में जाकर स्नान किया, जिसके कारण अंत समय में लालची ब्राह्मण पर भगवान विष्णु ने कृपा बरसाई और ब्राह्मण के लिए मोक्ष प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त हुए।