सिद्धिविनायक मंदिर: 6 जनवरी को अंगारकी चतुर्थी पर विशेष व्यवस्था, जानें दर्शन का पूरा शेड्यूल

Siddhivinayak Temple News: मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में 6 जनवरी को साल की पहली अंगारकी चतुर्थी मनाई जाएगी। भारी भीड़ के मद्देनजर दर्शन के लिए अलग-अलग कतारों और सिंदूर लेपन अनुष्ठान की घोषणा की है।
Shree Siddhivinayak Temple Darshan Update
श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Shree Siddhivinayak Temple Darshan Update: मुंबई का प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर 6 जनवरी 2026 को 'अंगारकी संकष्टी चतुर्थी' के लिए पूरी तरह तैयार है। साल की पहली अंगारकी चतुर्थी होने के कारण लाखों भक्तों के आने की उम्मीद है, जिसके लिए मंदिर प्रशासन ने विशेष सुरक्षा और कतार प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

अंगारकी चतुर्थी का विशेष महत्व

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे 'अंगारकी संकष्टी चतुर्थी' कहा जाता है। भगवान गणेश के भक्त इस दिन को सामान्य चतुर्थी से अधिक शुभ मानते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और दर्शन करने से पूरे वर्ष की चतुर्थी का फल प्राप्त होता है और सभी विघ्न दूर होते हैं।

भक्तों के लिए दर्शन की नई व्यवस्था

भीड़ को नियंत्रित करने और सुगम दर्शन सुनिश्चित करने के लिए ट्रस्ट ने निम्नलिखित कतार व्यवस्था की है:

  • सामान्य कतार: पुरुष और महिलाओं के लिए मुख्य कतार रवींद्र नाट्य मंदिर से शुरू होगी।
  • महिलाओं के लिए विशेष इंतजाम: महिलाओं के लिए एक अलग कतार राजे संभाजी महाराज मैदान (रवींद्र नाट्य मंदिर पवेलियन) से शुरू की गई है।
  • प्राथमिकता कतार: वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों वाले माता-पिता के लिए अलग कतार की व्यवस्था है।
  • मुख दर्शन: जो भक्त केवल मुख दर्शन करना चाहते हैं, वे एस.के. बोले मार्ग और अगर बाजार होते हुए गेट नंबर 7 से प्रवेश कर सकते हैं।
  • अन्य सुविधाएं: भक्तों के लिए राजे संभाजी महाराज मैदान में जूते-चप्पल रखने की नि:शुल्क सुविधा उपलब्ध होगी।
  • सिंदूर लेपन: 5 दिनों तक नहीं होंगे मुख्य मूर्ति के दर्शन। अंगारकी चतुर्थी के समापन के बाद, मंदिर में एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान 'सिंदूर लेपन' शुरू होगा।
  • अवधि: बुधवार, 7 जनवरी से रविवार, 11 जनवरी 2026 तक।
  • अनुष्ठान: इस प्रक्रिया में विशेषज्ञों द्वारा मुख्य मूर्ति को सिंदूर से पुन: लेपित किया जाता है ताकि उसकी चमक बनी रहे।
  • दर्शन अपडेट: इन पांच दिनों के दौरान भक्त गर्भगृह की मूल मूर्ति के दर्शन नहीं कर पाएंगे। हालांकि, भक्तों की श्रद्धा के लिए प्रतिकृति मूर्ति (Replica Statue) के दर्शन की व्यवस्था रहेगी।

दर्शन का समय और समापन

सिंदूर लेपन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सोमवार, 12 जनवरी 2026 को विशेष पूजा, नैवेद्य और आरती का आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात दोपहर 1:00 बजे से सभी श्रद्धालु हमेशा की तरह मुख्य मूर्ति के दर्शन कर सकेंगे। प्रशासन ने भक्तों से अनुरोध किया है कि वे नियमों का पालन करें और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग दें।

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