Pandav (Source. AI)
Why Did Sahadev Eat His Father’s Brain: महाभारत को हिंदू धर्म में पंचम वेद के समान दर्जा प्राप्त है। इसी महाग्रंथ से भगवद्गीता का उद्गम हुआ, जो आज भी मानव जीवन को धर्म, कर्म और सत्य का मार्ग दिखाती है। महाभारत सिर्फ युद्ध की कथा नहीं, बल्कि इसमें धर्म-अधर्म, प्रेम-घृणा, विश्वास-विश्वासघात, क्रोध और संवेदनाओं का गहरा चित्रण मिलता है। इसी महागाथा में कई ऐसी कहानियां छिपी हैं, जो आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं।
महाभारत से जुड़ी एक कथा ऐसी भी है, जो सुनने में अजीब और चौंकाने वाली लगती है। इस कथा के अनुसार, पांडवों में से एक ने अपने ही पिता का मस्तिष्क खा लिया था। यह घटना न सिर्फ असामान्य है, बल्कि इसके पीछे छिपा कारण भी उतना ही गूढ़ है।
महाभारत की कथा के अनुसार, पांडवों में सबसे छोटे भाई सहदेव ने अपने पिता राजा पांडु का मस्तिष्क खाया था। सहदेव को भविष्य देखने की दिव्य क्षमता प्राप्त थी। कहा जाता है कि महाभारत युद्ध से पहले स्वयं दुर्योधन भी सहदेव के पास सही मुहूर्त जानने के लिए गया था। सहदेव जानते थे कि दुर्योधन उनका सबसे बड़ा शत्रु है, फिर भी उन्होंने युद्ध आरंभ करने का सही समय बता दिया।
कथा के अनुसार, राजा पांडु को ऋषि किंदम का श्राप प्राप्त था कि यदि वे किसी स्त्री से समागम करेंगे, तो उसी समय उनकी मृत्यु हो जाएगी। इसी कारण पांडु ने अपनी पत्नियों कुंती और माद्री से दूरी बनाए रखी। कुंती ने देवताओं के आह्वान से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन को जन्म दिया, जबकि माद्री ने मंत्र विद्या से नकुल और सहदेव को प्राप्त किया।
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एक दिन राजा पांडु संयम खो बैठे और पत्नी माद्री को गले लगाते ही उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु को समीप देखकर पांडु ने अपने पांचों पुत्रों को बुलाया और कहा कि वे उनका मस्तिष्क खा लें, ताकि उनका ज्ञान पुत्रों को मिल सके। सभी पुत्र भय और आश्चर्य से पीछे हट गए, लेकिन सहदेव ने पिता की आज्ञा स्वीकार कर ली।
जैसे ही सहदेव ने राजा पांडु का मस्तिष्क खाया, उन्हें भूत, भविष्य और वर्तमान का ज्ञान प्राप्त हो गया। राजा पांडु स्वयं महान ज्ञानी थे और चाहते थे कि उनका संपूर्ण ज्ञान उनके पुत्रों में जीवित रहे। इसी कारण उन्होंने यह असाधारण इच्छा प्रकट की थी।