षटतिला एकादशी (सौ.सोशल मीडिया)
Shattila Ekadashi Par Kya Karen: आज 14 जनवरी को ‘षटतिला एकादशी’ मनाई जा रही है। यह एकादशी हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। जगत के संचालनकर्ता माने जाने वाले भगवान श्री विष्णु की पूजा के लिए एकादशी व्रत को अत्यधिक पुण्यदायी माना गया है। इस व्रत का महत्व तब और भी ज्यादा बढ़ जाता है, जब यह माघ मास के कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि पर पड़ता है।
जैसा कि आप जानते हैं कि, एकादशी तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु और उनकी अर्धांगिनी मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
इस दिन तिल का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी पर नियमों का विधिपूर्वक पालन करने से पैसों की दिक्कत दूर होती है और जीवन में सुख-शांति आती है। लेकिन अगर कुछ गलतियां हो जाएं, तो पूरे साल आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
शास्त्रों के अनुसार, षटतिला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है। ऐसा न करने पर पूजा और व्रत का पूरा फल नहीं मिलता।
एकादशी के दिन चावल खाना मना होता है। साथ ही तामसिक भोजन जैसे मांस, शराब, प्याज और लहसुन से भी दूर रहना चाहिए।
एकादशी के शुभ एवं पवित्र दिन पर किसी से झगड़ा करना, झूठ बोलना या गुस्सा करना अच्छा नहीं माना जाता। इससे नकारात्मक असर पड़ता है।
एकादशी के दिन दान करना अत्यंत शुभ होता है। अगर कोई जरूरतमंद मदद मांगे तो उसे खाली हाथ न लौटाएं। माना जाता है कि इस दिन दान न करने से धन की कमी हो सकती है।
इस दिन तिल का सेवन करना शुभ होता है लेकिन तिल का अपमान करने से बचना चाहिए। तिल को जमीन पर फेंकना या बेकार करना अशुभ माना जाता है। तिल इस दिन बहुत पवित्र माने जाते हैं।
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हिन्दू लोक मान्यता के अनुसार, षटतिला एकादशी सिर्फ व्रत नहीं, बल्कि अच्छे कर्म और संयम का दिन है। इस दिन की गई छोटी सी गलती भी नुकसान दे सकती है, जबकि सही तरीके से पूजा और दान करने से धन, सुख और शांति मिलती है। इसलिए इस पावन दिन नियमों का ध्यान रखें और श्रद्धा से व्रत करें।