होलिका दहन(सौ. Gemini)
Holika Dahan Rules: होली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है। इस दिन लोग अग्नि प्रज्वलित कर भगवान से प्रार्थना करते हैं कि जीवन की सभी नकारात्मक शक्तियां भस्म हो जाएं और सुख-समृद्धि का आगमन हो।
हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन का दिन पूजा-पाठ के लिहाज से बहुत ही शुभ माना जाता है और इस दिन कुछ नियमों का पालन करना बहुत ही जरूरी बताया गया है।
होलिका दहन परंपरानुसार शाम के समय किया जाता है, जबकि उससे पहले महिलाएं सुबह होलिका का विधि-विधान से पूजन करती हैं। मान्यता है कि यह पूजन यदि शुभ मुहूर्त में किया जाए तो अधिक फलदायी और मंगलकारी होता है।
होलिका दहन का पूजन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन किया जाता है। पूर्णिमा तिथि को हिंदू धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है। इस दिन व्रत रखकर शुभ मुहूर्त में होलिका दहन का पूजन करना मंगलकारी माना जाता है।
ज्योतिषयों के अनुसार, होलिका दहन के दिन यदि घर की उत्तर दिशा में घी का दीपक जलाया जाए तो घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। ऐसा करना बहुत ही शुभ माना गया है।
होलिका दहन की सुबह की पूजा में सरसों, तिल, 11 सूखे गोबर के उपले, अक्षत, चीनी, गेहूं के दाने और गेहूं की बाली का विशेष उपयोग किया जाता है। इन सामग्रियों को श्रद्धा भाव से अर्पित कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की जाती है।
होलिका की पूजा के बाद 7 परिक्रमा करते हुए जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके पश्चात दान करना भी मंगलकारी होता है। ध्यान रहे कि होलिका की पूजा हमेशा ठंडी की जाती है, इसलिए उसके पास दीपक नहीं जलाया जाता।
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