Shri Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)
Leave Worries And Live Happily: प्रसिद्ध संत Shri Premanand Ji Maharaj का सरल लेकिन गहरा संदेश है “चिंता छोड़ो, प्रभु की मस्ती में रहो।” आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह वाक्य किसी औषधि से कम नहीं। वे कहते हैं कि जीवन में कैसी भी परिस्थिति आए, मन में कमजोरी नहीं आने देनी चाहिए। जो भी स्थिति सामने है, वह आपके इष्ट द्वारा ही भेजी गई है। जब प्रभु ने उसे चुना है, तो उसमें आपका कल्याण ही छिपा है। फिर डर और चिंता किस बात की?
अक्सर मन में सवाल उठता है जो अधर्म कर रहे हैं, वे सुखी क्यों दिखते हैं? महाराज समझाते हैं कि पापियों का बढ़ता ऐश्वर्य उनके पुण्यों के समाप्त होने का संकेत है। यह वैसा ही है जैसे फांसी की सजा पाए अपराधी की अंतिम इच्छा पूरी की जाती है। इसलिए किसी के अस्थायी सुख को देखकर ईर्ष्या न करें। धर्म का मार्ग कठिन दिख सकता है, पर अंततः वही स्थायी सुख देता है।
भगवान दयालु हैं, पर न्यायप्रिय भी। आत्मा को न आग जला सकती है, न शस्त्र काट सकता है; लेकिन देह-अभिमान में किए गए कर्मों का फल अवश्य मिलता है। इसलिए मांस, मदिरा, व्यभिचार और पापाचार से दूर रहने की सीख दी गई है। क्षणिक सुख के लिए पाप करना अंततः दुख ही देता है।
यदि अनजाने में कोई गलती हो जाए, तो संतों और गुरु की शरण में जाकर स्वीकार करना चाहिए। गुरु के सामने छल-कपट नहीं चलता। उनका एक वचन “जाओ, कोई बात नहीं” भारी से भारी अपराध को क्षमा करने की शक्ति रखता है। संसार रूपी दलदल से निकलने का मार्ग गुरु-कृपा से ही खुलता है।
जो लोग आपकी निंदा करते हैं, वे वास्तव में आपके सहायक हैं। प्रशंसा से पुण्य क्षीण होते हैं, पर निंदा को सहर्ष सुनने से अंतःकरण शुद्ध होता है। यह आध्यात्मिक उन्नति का गुप्त सूत्र है।
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भजन मार्ग में गलत संगति काले सर्प के समान है। यदि मन विचलित हो, तो पहले स्वयं को संभालें और तुरंत इष्ट को पुकारें। गृहस्थ हों या विरक्त, लक्ष्य केवल भगवत्-प्राप्ति होना चाहिए। नाम-जप को दिखावे या सांसारिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि प्रभु से जुड़ने के लिए करें।
महाराज कहते हैं यह मनुष्य जन्म अंतिम समझकर जियो। प्रभु से संबंध जोड़ लो, फिर संसार भी पुष्प वाटिका जैसा लगेगा। निरंतर नाम-जप ही परम कल्याण का मार्ग है।