चार दिवसीय पर्व पोंगल (सौ.सोशल मीडिया)
Pongal 2026: आज 13 जनवरी से चार दिवसीय पोंगल का पर्व शुरू हो गया है। पोंगल दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख और धूमधाम से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। यह फसल उत्सव, सूर्य देव की उपासना और कृतज्ञता का पर्व है, जिसे हर साल जनवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह में मनाया जाता है।
इस साल भी यह पारंपरिक त्योहार परिवारों में अपार उल्लास और जलवे के साथ मनाया जा रहा है। इस त्योहार को खास तौर पर तमिलनाडु तथा दुनिया भर में रहने वाले तमिल समुदाय बड़े उत्साह और परंपरा के साथ मनाते हैं।
यह फसल उत्सव, सूर्य देव की उपासना और कृतज्ञता का पर्व है, जिसे हर साल जनवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह में मनाया जाता है। इस साल भी यह पारंपरिक त्योहार परिवारों में अपार उल्लास और जलवे के साथ मनाया जा रहा है। आइए जानिए चार दिवसीय पोंगल पर्व से जुड़ी रोचक बातें
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पोंगल केवल एक फसल उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में कृतज्ञता, आत्मशुद्धि और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक है। यह चार दिवसीय पर्व मानव जीवन को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा से भरने का संदेश देता है। पोंगल के प्रत्येक दिन का अपना अलग आध्यात्मिक अर्थ और महत्व है।
भोगी पोंगल आत्मशुद्धि का दिन माना जाता है। इस दिन पुराने और अनुपयोगी वस्तुओं को त्यागने की परंपरा जीवन से नकारात्मक विचार, अहंकार और पुराने दुखों को छोड़ने का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए त्याग आवश्यक है।
आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन यानी सूर्य पोंगल यानी थाई पोंगल सूर्य देव को समर्पित होता है, जिन्हें जीवन, ऊर्जा और चेतना का स्रोत माना गया है। सूर्य को अर्घ्य देकर और पोंगल अर्पित करके व्यक्ति अपने जीवन में प्रकाश, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन आत्मज्ञान और चेतना के जागरण का संकेत देता है।
मट्टू पोंगल करुणा और कर्तव्य का प्रतीक है। गाय और बैलों की पूजा कर मानव और प्रकृति के बीच के पवित्र संबंध को स्वीकार किया जाता है। यह दिन सिखाता है कि जिन शक्तियों से हमारा जीवन चलता है, उनका सम्मान करना भी आध्यात्मिक धर्म है।
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कन्नुम पोंगल सामाजिक और पारिवारिक सामंजस्य का दिन है। परिवार, मित्रों और समाज के साथ समय बिताकर प्रेम, सद्भाव और संतुलन को बढ़ावा दिया जाता है। आध्यात्मिक रूप से यह दिन बताता है कि एकता और संबंध ही जीवन की वास्तविक समृद्धि हैं।
चार दिवसीय पोंगल पर्व त्याग, आभार, सेवा और सामूहिक आनंद का आध्यात्मिक संदेश देता है। यह पर्व मनुष्य को प्रकृति, समाज और स्वयं से जोड़कर जीवन में संतुलन और सकारात्मकता लाता है।