
वट सावित्री व्रत से जुड़े नियम (सौ.सोशल मीडिया)
Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं का प्रमुख त्योहार है। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। इस साल यह 26 मई, को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला उपवास रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं।
यह व्रत नारी शक्ति, समर्पण और प्रेम का प्रतीक माना जाता हैं। यह व्रत सावित्री और सत्यवान की कथा पर आधारित है, जिसमें सावित्री ने अपने तप और दृढ़ निश्चय से यमराज से अपने पति का जीवन वापस पाया था।
वहीं,आपको बता दें, इस व्रत के कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना बहुत जरूरी है, वरना व्रत टूट सकता है, तो आइए जानते हैं वट सावित्री व्रत से जुड़े नियम-
वट सावित्री व्रत के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान :
तामसिक भोजन ना करें
हिंदू परंपरा के अनुसार, वट सावित्री व्रत के पावन दिन सुहागिन महिलाओं को नॉनवेज जैसे मांस, मछली इत्यादि और तामसिक चीजें लहसुन, प्याज इत्यादि का सेवन नही करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत के नियम का उलंघन होता है और व्रत भंग हो जाता है। इसके अलावा ऐसा करने से पुण्य की जगह पाप बढ़ते हैं।
काले रंग का ना करें इस्तेमाल
कहते है वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं को काले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। चूंकि, काला रंग नकारात्मकता का प्रतीक है। इसलिए पूजा-पाठ जैसे शुभ और मांगलिक कार्यों में इस रंग का प्रयोग वर्जित है। ऐसे में सुहागिन महिलाओं को भी इस बात का विशेष ख्याल रखना चाहिए।
शुद्धता का रखें ख्याल
वट सावित्री व्रत के दिन शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की शुद्धता का खास ख्याल रखना चाहिए। इस दिन सुबह स्नान के बाद ही साफ कपड़े पहने और पूजा से पहले मानसिक शांति बनाए रखें।
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भूलकर भी न करें बुरा व्यवहार
इस दिन किसी से कटु वचन या बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए। खासतौर पर महिलाओं को व्रत के दिन शांत, संयमित और प्रेमपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। व्रत की भावना सेवा, प्रेम और श्रद्धा पर आधारित होती है।
वट वृक्ष की पूजा विधि में न करें लापरवाही
पूजा करते समय सावधानीपूर्वक सभी विधियों का पालन करें। वट वृक्ष की परिक्रमा 7 बार करें, सूत (कच्चा धागा) लपेटें और पूजा सामग्री जैसे फल, फूल, दीप, अक्षत आदि का समुचित प्रयोग करें।






