
Shakuni Dice (Source. Pinterest)
Mahabharata Chausar Katha: महाभारत का नाम लेते ही युद्ध, धर्म और अधर्म की बातें सामने आती हैं, लेकिन इस महागाथा का एक ऐसा रहस्य भी है जिसने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी शकुनि के मायावी पासे। ये पासे कोई साधारण खेल का साधन नहीं थे, बल्कि उनमें छुपी थी तंत्र विद्या, बदले की भावना और विनाश की योजना। इन्हीं पासों के कारण पांडवों ने अपना राज्य गंवाया, द्रौपदी का अपमान हुआ और 13 वर्षों का वनवास झेलना पड़ा। सबसे बड़ा सवाल आज भी यही है शकुनि की मृत्यु के बाद उसके पासों का क्या हुआ?
महाभारत में पासों के निर्माण का पूरा विवरण नहीं मिलता, लेकिन पुराणों और लोककथाओं में इसका उल्लेख है। शकुनि की बहन गांधारी का विवाह अंधे राजा धृतराष्ट्र से हुआ, जिससे शकुनि के मन में गहरा आक्रोश पैदा हुआ।
कहा जाता है कि उसने इसी पीड़ा को अपनी शक्ति बनाया और तंत्र विद्या के माध्यम से अपने माता-पिता की हड्डियों से मायावी पासों का निर्माण किया। इन पासों में शकुनि की इच्छा और नियंत्रण समाया हुआ था। जब भी वह पासे फेंकता, अंक उसी के पक्ष में आते। यही वजह थी कि चौसर का खेल पहले से ही पांडवों की हार तय कर चुका था।
शकुनि के पासों की सबसे बड़ी विशेषता उनका मायावी स्वभाव था। ये पासे किसी नियम या संयोग पर नहीं, बल्कि पूरी तरह शकुनि के इशारों पर चलते थे। चौसर में पांडवों की लगातार हार और द्रौपदी को दांव पर लगना इसी का परिणाम था। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण को ही इस रहस्य का पूरा ज्ञान था कि यह खेल नहीं, बल्कि शक्ति और छल का षड्यंत्र है।
महाभारत युद्ध में जब सहदेव ने शकुनि का वध किया, तब पांडवों ने उसके शिविर में जाकर पासों को नष्ट करने की कोशिश की। लेकिन ये पासे साधारण नहीं थे। मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने स्वयं पासों को मसलकर राख बना दिया, लेकिन जब वह राख जल के संपर्क में आई तो पासे फिर से अपने पुराने रूप में लौट आए। अंततः अर्जुन ने उन्हें समुद्र में बहा दिया। कहा जाता है कि वहीं से ये पासे कलयुग में जुए की प्रवृत्ति के रूप में फिर प्रकट हुए।
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शकुनि के पासे यह सिखाते हैं कि लालच, छल और सत्ता की भूख अंततः विनाश की ओर ले जाती है। यह कहानी बताती है कि इंसान के कर्म और उसकी बनाई चीजें, मृत्यु के बाद भी अपना प्रभाव छोड़ सकती हैं। महाभारत का यह रहस्य आज भी हमें चेतावनी देता है कि अधर्म से मिली जीत कभी स्थायी नहीं होती।






