क्या सच में एक ही रामायण है? जानिए कैसे 300 से ज्यादा रूपों में बंटी है रामकथा

Ramayana Versions: रामायण को लेकर आमतौर पर यह धारणा प्रचलित है कि जो कथा हमने बचपन में सुनी चाहे वह वाल्मीकि रामायण हो या तुलसीदास की रामचरितमानस वही "असली" रामायण है और वही कथा वास्तव में घटी थी।
Is there really only one Ramayana? Learn how the story of Rama has been divided into more than 300 versions.
Ramayan (Source. Pinterest)
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Three Hundred Ramayanas In World: रामायण को लेकर आमतौर पर यह धारणा प्रचलित है कि जो कथा हमने बचपन में सुनी चाहे वह वाल्मीकि रामायण हो या तुलसीदास की रामचरितमानस वही "असली" रामायण है और वही कथा वास्तव में घटी थी। लेकिन हालिया शोध और विद्वानों की मानें तो रामायण किसी एक ग्रंथ या एक कथा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत परंपरा है, जो सदियों से अलग-अलग रूपों में विकसित होती रही है।

एक रामायण नहीं, अनेक कथाएं

विद्वानों के अनुसार, भारत और एशिया में रामायण की सैकड़ों कथाएं प्रचलित हैं। प्रसिद्ध विद्वान ए.के. रामानुजन ने अपने चर्चित निबंध "Three Hundred Ramayanas" में बताया है कि एशिया भर में रामायण के 300 से ज्यादा संस्करण मौजूद हैं। इनमें से लगभग 70-80 संस्करण ऐसे हैं, जो केवल भाषा नहीं बल्कि दृष्टिकोण और कथा-शैली के स्तर पर भी एक-दूसरे से काफी अलग हैं। बाकी 220-250 संस्करण क्षेत्रीय और भाषाई रूपांतरण माने जाते हैं।

अलग-अलग नजरियों से रामकथा

कुछ रामायणों में कथा सीता के दृष्टिकोण से कही गई है, तो कुछ में हनुमान या रावण केंद्र में हैं। हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आई हनुमान से जुड़ी लंबी सीरीज ने यह दिखाया कि रामायण के भीतर भी कितनी विस्तृत उपकथाएं मौजूद हैं, जिन पर आम तौर पर कम चर्चा होती है।

जैन, बौद्ध और दक्षिण-पूर्व एशियाई रामायण

रामायण केवल हिंदू परंपरा तक सीमित नहीं है। जैन रामायणों में रावण को अधिक नैतिक और राम को सामान्य मानव बताया गया है, न कि ईश्वर। बौद्ध परंपरा में राम को बोधिसत्व (भविष्य के बुद्ध) के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वहीं थाईलैंड की रामकिएन या कंबोडिया की रीमकेर जैसी दक्षिण-पूर्व एशियाई रामायणों में कथा का स्वर, हास्य और पात्रों का व्यवहार तक बदल जाता है।

देव से ईश्वर तक राम की यात्रा

प्रारंभिक रामायणों में राम को एक आदर्श मानव और राजा के रूप में दिखाया गया था। बाद की रचनाओं जैसे अध्यात्म रामायण और रामचरितमानस में राम को पूर्ण रूप से ईश्वर के रूप में प्रतिष्ठित किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि रामायण का केंद्र समय के साथ बदलता रहा कहीं धर्म, कहीं भक्ति, कहीं अहिंसा और कहीं आध्यात्मिक ज्ञान।

विद्वानों की दृष्टि में रामायण

अधिकांश विद्वान और कथावाचक मानते हैं कि ये सभी संस्करण अपनी-अपनी परंपरा में "मान्य" रामायण हैं। यही कारण है कि किसी एक कथा को "एकमात्र सच्ची रामायण" कहना अकादमिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। रामायण को आज एक विशाल वृक्ष की तरह देखा जाता है एक तना (राम की यात्रा) और सैकड़ों शाखाएं (विविध व्याख्याएं)। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसने इसे 2,000 से अधिक वर्षों तक जीवंत बनाए रखा है।

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