इस साल करवा चौथ पर भद्रा का साया है या नहीं, जानिए कौन हैं भद्रा
Bhadra Time :करवा चौथ पर इस साल भद्रा का साया नहीं रहेगा। क्योंकि, करवा चौथ से एक दिन पूर्व की भद्रा समाप्त हो जाएगी। गुरुवार 9 अक्टूबर 2025 दोपहर 12:37 से रात 10:54 तक भद्रा काल रहेगा।
- Written By: सीमा कुमारी
क्या इस साल करवा चौथ पर रहेगा भद्रा का साया (सौ.सोशल मीडिया)
Karwa Chauth Bhadra Time : सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला करवा चौथ का पावन पर्व इस बार 10 अक्टूबर 2025 को है। यह सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। जिसका इंतजार उन्हें पूरे साल रहता है। करवा चौथ पर निर्जला व्रत रखकर सुहागिनें पति की लंबी आयु की कामना करती है।
करवा चौथ पर माता करवा, चंद्रदेव और शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। पूजा के लिए शाम 05:32 से 7:10 तक का समय रहेगा। मान्यता है कि, मां पार्वती ने भगवान शिव के लिए और द्रौपदी ने पांडवों के लिए यह व्रत रखा था। करवा चौथ का व्रत रखने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
लेकिन, ज्योतिषयों के अनुसार, कई बार शुभ दिन पर बनने वाले अशुभ योग या भद्रा का साया पड़ने से पूजा में बाधा उत्पन्न होती है। इसलिए अशुभ समय और भद्रा काल में पूजा करना वर्जित होता है। ऐसे में आइए जानते हैं क्या इस साल करवा चौथ पर भद्रा का साया रहने वाला है या नहीं।
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क्या इस साल करवा चौथ पर रहेगा भद्रा का साया
आपको बता दें, पंचांग के मुताबिक, करवा चौथ पर इस साल भद्रा का साया नहीं रहेगा। क्योंकि, करवा चौथ से एक दिन पूर्व की भद्रा समाप्त हो जाएगी। गुरुवार 9 अक्टूबर 2025 दोपहर 12:37 से रात 10:54 तक भद्रा काल रहेगा।
ऐसे में 10 अक्टूबर को करवा चौथ पर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा और सुहागिनें भद्रा रहित मुहूर्त में पूजा करेंगी।
भद्रा का जनजीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है
हिन्दू धर्म में भद्रा काल का विशेष महत्व होता है और यह अशुभ मानी जाती है। इसलिए जब भी कोई मांगलिक कार्य किया जाता है या त्योहार आता है तो भद्रा की अवधि जरूर देखी जाती है।
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पुराणों के अनुसार भद्रा भगवान सूर्यदेव की पुत्री और शनि देव की बहन हैं। कर्म फल दाता की तरह इनका स्वभाव भी बहुत कड़क है। इसलिए भद्रा नक्षत्र में कोई भी शुभ काम करने की मनाही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ या मीन राशि में होता है, तब भद्रा का निवास पृथ्वी पर होता है, जो मानव जाति के लिए नुकसान दायक है। वहीं, जब भद्रा पाताल लोक में होती है तो शुभ फलदायी होती है।
