
मां नर्मदा (सौ.सोशल मीडिया)
Narmada Jayanti 2025 Date: मां नर्मदा को समर्पित नर्मदा जयंती इस बार 25 जनवरी को मनाई जा रही है। इसी दिन रथ सप्तमी भी होने से इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां नर्मदा की पूजा-अर्चना और दीपदान जरूर करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि मां नर्मदा की साधना करने से साधक को जीवन में सभी दुखों से मुक्ति मिलती है।
साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। क्या आप जानते हैं कि मां नर्मदा धरती पर कैसे अवतरित हुईं। अगर नहीं, तो ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि मां नर्मदा के अवतरण से जुड़ी कथा के बारे में।
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 25 जनवरी को रात 12 बजकर 39 मिनट पर होगी। वहीं, तिथि का समापन 25 जनवरी को 11 बजकर 10 मिनट पर होगा। ऐसे में नर्मदा जयंती 25 जनवरी को मनाई जाएगी।
ब्रह्म मुहूर्त- 05 बजकर 26 मिनट से 06 बजकर 19 मिनट तक
अमृत काल – सुबह 11 बजकर 15 मिनट तक से 12 बजकर 49 मिनट तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 20 मिनट तक से 03 बजकर 03 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 52 मिनट से 06:19 मिनट तक
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में मैखल पर्वत पर भगवान शिव तपस्या में लीन थे। उसी समय महादेव के पसीने से एक कन्या का जन्म हुआ, जिनका नाम नर्मदा रखा गया। नर्मदा का अर्थ है सुख प्रदान करने वाली।
भगवान शिव ने मां नर्मदा को आशीर्वाद दिया कि जो भी उनके दर्शन करेगा, उसका कल्याण होगा। मैखल पर्वत पर उत्पत्ति होने के कारण मां नर्मदा को मैखल राज की पुत्री भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नर्मदा नदी में स्नान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
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