अनूप जलोटा के भजनों ने बांधा समां। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
नागपुर: सौंसर के जामसांवली स्थित चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर (हनुमान लोक), जाम सांवली में हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित 3 दिवसीय श्री रामकथा का गुरुवार भक्तिमय वातावरण में समापन हुआ। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज के अमृतमयी वचनों को श्रवण करने के लिए मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और श्रद्धा के रंग में सराबोर हो गया। रामकथा के तृतीय दिवस का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों और भक्तिभाव के साथ हुआ।
मुख्य यजमानों में गुड्डू जेठा, प्रशांत पराड़कर, डॉ. राजेश गावंडे, टीकाराम कारोकर, संतोष डवरे, विठ्ठल डवरे, अरुण येलमुले, महादेव मते, संजू डवरे, पांडुरंग बोबडे और वसंता येलमुले ने सपत्नीक सामूहिक रूप से व्यासपीठ और पवित्र श्रीरामचरितमानस की विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने भी भक्तिभाव से पुष्पांजलि अर्पित की। इसके पश्चात, परम श्रद्धेय जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक प्रवचनों से तृतीय दिवस की श्री रामकथा का पाठ किया। उन्होंने श्रीरामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए जीवन के गूढ़ रहस्यों और आदर्श आचरण के सिद्धांतों पर विस्तृत प्रकाश डाला।
अपने सारगर्भित प्रवचन में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती जी ने गुरु के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस में गुरु को ज्ञान का अद्वितीय स्रोत माना गया है, जो साधक को परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करता है। गुरु न केवल दूरदर्शी होता है, बल्कि वह पूरे मानव समाज के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक भी होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरु के ज्ञान और मार्गदर्शन के बिना इस जीवन रूपी भवसागर से पार उतरना अत्यंत कठिन है। स्वामी जी ने श्रीरामचरितमानस में ज्ञान के महत्व को विस्तार से बताते हुए कहा कि ज्ञान सत्य और असत्य के बीच विवेक करने की क्षमता प्रदान करता है। यह भक्ति का सुदृढ़ आधार बनता है और अंततः साधक को मोक्ष की ओर ले जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को ज्ञान प्राप्त करने और उसे अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
गुरुवार की इस विशेष संध्या में आयोजित महाआरती में प्रमुख समाजसेवी प्रवीण दुबे, अशोक सुदा, राधेश्याम सुदा एवं परिवार विशेष रूप से सम्मिलित हुए। उन्होंने भगवान श्री हनुमान जी की भक्तिभाव से पूजा-अर्चना की और सभी भक्तों की सुख-समृद्धि और कल्याण के लिए प्रार्थना की। महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे मंदिर परिसर भक्तिमय ध्वनियों से गुंजायमान हो उठा।
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हनुमान जन्मोत्सव की श्रृंखला में आज भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रसिद्ध हरिकथा वाचक ह.भ. प. धनंजय महाराज वासाडे, अध्यक्ष बलराम महाराज वसाडे संस्थान श्री क्षेत्र पंढरपुर ने अपने प्रेरणादायक हरिकीर्तन से उपस्थित श्रोताओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। उनके ओजस्वी वाणी और भक्तिमय संगीत ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। तत्पश्चात संध्या को वाराणसी के आए हुए पुरोहितों द्वारा विशाल मंच पर गंगा आरती कर परिसर को आध्यात्मिक बना दिया। श्रद्धालुओं ने गंगा आरती में दिव्यता का अनुभव किया।
जन्मोत्सव कार्यक्रमों की श्रृंखला में, सुप्रसिद्ध भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा की विशाल भजन संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम पूर्व उन्होंने श्री हनुमानजी की पूजा अर्चना की। भजन संध्या में जलोटा ने अपनी मधुर आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुति से उपस्थित जनसमुदाय को भक्ति के सागर में डुबो दिया। उनके लोकप्रिय भजनों को सुनकर श्रद्धालु झूम उठे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण गुंज उठा। भजन संध्या में सभी आयु वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
भजन संध्या में प्रमुख रूप से सांसद विवेक बंटी साहू, पूर्व मंत्री नाना भाऊ मोहोड़, विधायक परिणय फुके, न्यास के सदस्य संदीप मोहोड़, राहुल देव ठाकरे, कलेक्टर अजय देव शर्मा, पुलिस अधीक्षक सुंदर सिंह कनेश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीरज सोनी, न्यास के प्रशासक एवं अनुविभागीय अधिकारी सिद्धार्थ पटेल समेत सभी न्यासीगण एवं जाम सांवली हनुमान के जी अनन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस शुभ अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष गोपाल शर्मा एवं मंदिर के न्यासीगणों ने कार्यक्रम में पधारे हुए विशिष्ट अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। शर्मा जी ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी आयोजकों, स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।