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जब दानवीर कर्ण ने यज्ञ की अग्नि के लिए महल के चंदन द्वार काट दिए, त्याग की वो कथा जो आज भी झकझोर देती है

The Story of Karna: महाभारत में कर्ण का नाम आते ही दान, त्याग और कर्तव्य की छवि सामने आ जाती है। कर्ण केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि ऐसे चरित्र थे जिनके लिए मानवता और दान सर्वोपरि था।

  • Written By: सिमरन सिंह
Updated On: Feb 05, 2026 | 06:50 PM

Mahabharata Karna (Source. Pinterest)

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Mahabharata Karna: भारतीय महाकाव्य महाभारत में कर्ण का नाम आते ही दान, त्याग और कर्तव्य की छवि सामने आ जाती है। कर्ण केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि ऐसे चरित्र थे जिनके लिए मानवता और दान सर्वोपरि था। कर्ण के जीवन से जुड़ी एक ऐसी ही कथा आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती है जब उन्होंने एक ब्राह्मण की यज्ञ अग्नि के लिए अपने महल के चंदन के दरवाजों को काट देने का बलिदान दिया।

कर्ण का दान: केवल धन नहीं, आत्मा का समर्पण

कर्ण के द्वार से कोई भी याचक खाली हाथ नहीं लौटा। यही कारण था कि उन्हें दानवीर कर्ण कहा गया। उनके लिए दान का अर्थ केवल सोना-चांदी देना नहीं था, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर अपने सुख, वैभव और सम्मान का त्याग करना भी दान ही था।

ब्राह्मण की याचना और कर्ण का निर्णय

कथा के अनुसार एक ब्राह्मण कर्ण के पास आया और यज्ञ के लिए लकड़ी की याचना की। उस समय आसपास कोई साधारण लकड़ी उपलब्ध नहीं थी। लेकिन कर्ण ने एक क्षण भी सोच-विचार नहीं किया। उन्होंने अपने महल की ओर देखा, जिसके द्वार शुद्ध चंदन की लकड़ी से बने थे। यहीं वह ऐतिहासिक क्षण आता है, जब कहा गया, “कर्ण ने एक ब्राह्मण की यज्ञ अग्नि के लिए अपने महल के चंदन के दरवाजों को काटने का बलिदान।”

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वैभव से बड़ा धर्म

चंदन जैसे कीमती और सुगंधित लकड़ी के द्वार उस समय शाही वैभव और प्रतिष्ठा का प्रतीक थे। लेकिन कर्ण के लिए धर्म और यज्ञ की पवित्रता, राजसी ठाठ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण थी। उन्होंने बिना किसी संकोच के उन द्वारों को कटवाकर ब्राह्मण को दान में दे दिया।

आज के समय में कर्ण की सीख

आज जब हर चीज का मूल्य पैसों से आंका जाता है, कर्ण की यह कथा हमें यह सिखाती है कि सच्चा दान वही है जो अहंकार और स्वार्थ से मुक्त हो। कर्ण का त्याग हमें याद दिलाता है कि इंसान की पहचान उसके संग्रह से नहीं, बल्कि उसके त्याग से होती है।

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कर्ण: एक उपेक्षित लेकिन महान नायक

इतिहास और साहित्य में कर्ण को अक्सर अन्याय का शिकार दिखाया गया, लेकिन उनके कर्म उन्हें अमर बना गए। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर नीयत शुद्ध हो तो इंसान महान बन सकता है।

ध्यान दें

कर्ण की यह कथा केवल पौराणिक कहानी नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए एक नैतिक आईना है। त्याग, दया और कर्तव्य ये मूल्य कभी पुराने नहीं होते।

Generous karna cut down the sandalwood gates of his palace for the sacrificial fire

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Published On: Feb 05, 2026 | 06:50 PM

Topics:  

  • Mahabharat
  • Religion
  • Sanatana Dharma

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