तुम्हारा नंबर कभी भी आ सकता है! जीवन, मृत्यु और सच्ची तैयारी पर Shri Premanand Ji Maharaj का सीधा संदेश

Reality of Death: क्या तुम्हें पता है कि मृत्यु कब आएगी? क्या यह निश्चित है कि वह बुढ़ापे में ही आएगी? Shri Premanand Ji Maharaj बताते हैं कि मृत्यु अचानक होती है शैशव में, युवावस्था की चमक में है।
direct message from Shri Premanand Ji Maharaj on life, death, and true preparation.
Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)
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Sangopang Upasana: मित्र , क्या तुम्हें पता है कि मृत्यु कब आएगी? क्या यह निश्चित है कि वह बुढ़ापे में ही आएगी? Shri Premanand Ji Maharaj बताते हैं कि मृत्यु अचानक होती है शैशव में, युवावस्था की चमक में या किसी भी पल। दुनिया जीने की जद्दोजहद में उलझी है, पर मरने की तैयारी करने वाले विरले ही होते हैं।

मोह का मायाजाल: जो दिखता है, वही सबसे बड़ा धोखा

हम अपने शरीर, घर, धन, पत्नी और बच्चों की "सुखद" धारणाओं में डूबे रहते हैं। वंश, दौलत और ओहदे का घमंड हमें ईश्वर से दूर करता है। चक्रवर्ती सम्राट भी हो जाएँ, तो क्या? इस संसार से एक दाना भी साथ नहीं जाता। "सात जन्मों" के रिश्तों की बात करते हैं, जबकि अगले एक मिनट का भरोसा नहीं। पूर्व जन्मों की अनगिनत परिवार-श्रृंखलाएँ स्मृति से मिट चुकीं तो इस एक जीवन के मोहरूपी जाल में इतना उलझाव क्यों? अंततः केवल भगवत-विद्या ही आत्मा के साथ जाती है।

मृत्यु-भय पर विजय का रहस्य: पवित्र नाम

मृत्यु के आतंक से उबरने का मार्ग है "संगोपांग उपासना" गुरु द्वारा दी गई पूर्ण साधना: नाम, मंत्र और शास्त्र। जब मन अपने इष्ट के नाम में रमता है, प्रभु स्वयं साधक की ज़िम्मेदारी लेते हैं। सच्चा साधक टिकट और बैग तैयार रखता है। नाम हृदय में धड़कता रहे, तो मृत्यु का डंक निष्प्रभावी हो जाता है। जैसे ध्रुव जी ने काल के मस्तक पर चरण रखे, वैसे ही अनन्य भक्त मृत्यु पर विजय पाता है।

वृंदावन: परम आनंद का धाम

यदि देह सांसारिक दायित्व न निभा पाए या परम शांति की चाह हो, तो श्रीधाम वृंदावन आइए। यह केवल स्थान नहीं यह अमृतमय धाम है, जहाँ परम सत्य राधा-कृष्ण के रूप में लीला करता है। धाम-वास ईश्वर-प्राप्ति का शॉर्टकट है। जो फल कठिन तप से मिलता है, वह यहाँ निवास से सहज मिल जाता है पर शर्त है पूर्ण समर्पण। कष्ट भी प्रभु-कृपा मानकर सहना होगा। एक संत ने कहा था: "मैं वृंदावन रहने नहीं आया था; मैं यहाँ मरने आया था।"

अंतिम निवेदन: अभी से तैयारी करें

मनुष्य देह ही वह अवसर है जहाँ अंतिम यात्रा की तैयारी संभव है। अहं त्यागें, इंद्रियों पर संयम रखें और प्रिया-प्रितम के चरणों में मन टिकाएँ। जो केवल प्रभु के लिए जीता है, उसके ऋणी श्यामल-श्यामा भी हो जाते हैं। तैयार रहिए तुम्हारा नंबर कभी भी आ सकता है। अंतिम श्वास हो "राधा राधा"।

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