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भगवान शिव के गले में क्यों है नाग का हार, इस नाग का क्या है नाम? ज़रूर जानिए

Lord Shiva: भगवान शिव के गले में विराजमान नाग का विशेष महत्व माना जाता है। यह नाग आत्मसंयम, भय पर विजय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का प्रतीक है, जो शिव के वैराग्य और अद्भुत स्वरूप को दर्शाता है।

  • Written By: सीमा कुमारी
Updated On: Feb 05, 2026 | 04:43 PM

शिव के गले नाग का हार (सौ.सोशल मीडिया)

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Shiv Ji Ke Gale Me Saanp Kyu Hai : महाशिवरात्रि का पर्व आने में अब महज कुछ दिन ही शेष रह गए हैं। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु व्रत, रात्रि जागरण तथा शिवलिंग पर जल-दूध से अभिषेक कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, सुख-समृद्धि बढ़ती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

जैसा कि आपने देखा होगा कि भगवान शिव के गले में नाग विराजमान रहता है,भगवान शिव के गले में लिपटे हुए सर्प को देखना जितना डरावना लग सकता है, उसका आध्यात्मिक और पौराणिक अर्थ उतना ही गहरा है। शिव का “सर्प माला” धारण करना उनके वैराग्य और उनकी शक्ति दोनों का प्रतीक है

हालांकि इन चीजों को धारण करने के पीछे अलग-अलग रहस्य भी जुड़े हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों शिव गले में नाग धारण करते हैं और इस नाग का क्या नाम है।

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आखिर भगवान शिव के गले में क्यों है नाग का हार?

ऐसी मान्यता है कि, शिवजी का गले में नाग धारण करना इस बात को दर्शाता है कि शिवजी की महिमा केवल मानव नहीं बल्कि जीव-जंतु के साथ नागों पर भी है। भगवान शिव मनुष्यों के साथ-साथ नाग-नागिन के भी आराध्य देव माने जाते हैं और नाग-नागिन भी उन्हें अपना भगवान मानते हैं। इसलिए शिव जी अपने गले में हमेशा रुद्राक्ष की माला के साथ ही सांप भी धारण किए होते हैं।

देवाधिदेव भगवान शिव जी के गले में क्यों लिपटा रहता है सांप

पौराणिक कथा के अनुसार, नागराज वासुकी भगवान शिव के परम भक्त थे। वे हमेशा शिव जी की पूजा करने में लीन रहते थे। समुद्र मंथन के दौरान नागराज वासुकी ने रस्सी का काम किया था, जिससे सागर को मथा गया था। इसके बाद इनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने इन्हें नागलोक का राजा बना दिया। साथ ही अपने गले में आभूषण की भांति लिपटे रहने का वरदान दिया।

कैसे बने नागराज वासुकी शिव के सेवक

पौराणिक कथा की मानें तो, नागकुल के सभी नाग शिव के क्षेत्र हिमालय में वास करते थे। शिव को भी नागवंशियों से बहुत लगाव था। शुरुआत में नागों के पांच कुल थे, जिसमें शेषनाग, वासुकी, तक्षक, पिंगला और कर्कोटक थे।

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नागों के इन पांच कुल को देवताओं की श्रेणी में रखा गया इनमें शेषनाग को नागों का पहला राजा माना जाता है, जिसे अनंत नाम से भी जाना जाता है। आगे चलकर शेषनाग के बाद वासुकी नागों के राजा हुए, जो भगवान शिव के सेवक भी बनें। वासुकी के बाद तक्षक और पिंगला ने राज्य संभाला।

Mahashivratri lord shiva naag symbolism and significance

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Published On: Feb 05, 2026 | 04:43 PM

Topics:  

  • Lord Shiva
  • Mahashivratri
  • Mahashivratri worship
  • Religion

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