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आज छठ पूजा के तीसरे दिन दिया जाएगा संध्या अर्घ्य, दानवीर कर्ण से जुड़ी है कथा

आज छठ पर्व के तीसरे दिन यानी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजन किया जाता है। अर्घ्य देने का इतिहास एक कहानी को लेकर प्रचलित है यानि इसका इतिहास दानवीर कर्ण से जुड़ा हुआ है।

  • By दीपिका पाल
Updated On: Nov 07, 2024 | 07:52 AM

छठ व्रत पूजा (सौ.सोशल मीडिया)

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Chhath puja 2024: इन दिनों छठ का महापर्व चल रहा है वहीं पर इन चार दिनों के पवित्र दिनों में महिलाएं 36 घंटे का कठिन व्रत रखती है। छठ पूजा का महत्व हर तरह से खास होता है नहाय-खाय से शुरुआत होने के साथ ही अर्घ्य देने तक के नियम चलते है। आज छठ पर्व के तीसरे दिन यानी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजन किया जाता है। अर्घ्य देने का इतिहास एक कहानी को लेकर प्रचलित है यानि इसका इतिहास दानवीर कर्ण से जुड़ा हुआ है। चलिए जानते है कथा और शुभ मुहुर्त।

जानिए अर्घ्य देने का शुभ समय

यहां पर द्रिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 7 नवंबर को सूर्योदय सुबह 6:42 बजे होगा. वहीं, सूर्यास्त शाम 5:48 बजे होगा. इस दिन भक्त कमर तक पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. ऐसे में छठ पर्व के तीसरे दिन सूर्य को अर्घ्य देने के लिए शाम 5 बजकर 29 मिनट तक का समय रहेगा।

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जानिए अर्घ्य देने की पौराणिक कथा

यहां पर अर्घ्य देने को लेकर पौराणिक कथा के अनुसार बताया कि, महाभारत काल में माता कुंती के पुत्र दानवीर कर्ण ने भी सूर्यदेव को जल अर्घ्य दिया था, कर्ण को माता कुंती के अलावा, सूर्यदेव का पुत्र भी माना जाता है। सूर्य देव की दानवीर कर्ण पर विशेष कृपा थी, ऐसा कहा जाता है कि कर्ण रोजाना सुबह उठकर घंटों तक पानी में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देते थे। सूर्यदेव की कृपा से कर्ण एक महान योद्धा बन गए थे। इसके अलावा कथा के अनुसार बताया गया कि, महाभारत में जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए के खेल में हार बैठे थे, तब द्रौपदी ने भी छठ व्रत रखा था. द्रौपदी के व्रत और पूजा से प्रसन्न होकर षष्ठी मैया ने पांडवों को उनका राज्य वापस लौटा दिया था।

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यहां पर छठ पूजा का अलग ही महत्व होता है इसे करने से श्रद्धालुओं को शुभ फल की प्राप्ति होती है।

Evening prayer will be given on the third day of chhath puja

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Published On: Nov 07, 2024 | 07:52 AM

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